नूंह। जिला पुलिस विभाग में लंबे समय से स्टाफ व संसाधनों का अभाव है। जहां एक ओर स्टाफ नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर थानों व चौकियों को मिलीं गाड़ियां भी पुरानी व जर्जर हो चुकी हैं। इंटर स्टेट 12 नाका है, इसके अलावा इंटर जिला नाकों की भी संख्या अधिक है। इसके सापेक्ष जिले में पुलिस जवानों के कुल 1467 पद हैं, इनमें से 900 पद भरे हैं जबकि 567 पद खाली हैं। वहीं इनमें भी 85 जवान अंडर ट्रांसफर हैं।
नूंह जिले की सीमाएं राजस्थान के अलावा उतर प्रदेश राज्य से सटी है। अपराधी क्राइम कर दूसरे राज्यों में भागने की फिराक में होते हैं। जिले में वर्तमान में 12 थाने, 8 चौकी के अलावा एक महिला थाना, ट्रैफिक थाना है। बेटियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए स्कूल-कॉलेज के बाहर दुर्गा वाहिनी भी तैनात है। प्रदेश सरकार की 112 हेल्पलाइन की 20 गाड़ियां हैं। हर गाड़ी पर पुलिस के 4 जवान तैनात हैं। इससे भी पुलिस का कार्य प्रभावित हुआ है। अगर सरकार द्वारा स्टाफ की आपूर्ति करा दी जाए तो जवानों को काफी आसानी हो सकती है।
जिला पुलिस स्टाफ पर एक नजर
पद पोस्ट भरे खाली
पुलिस अधीक्षक 1 1 0
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक 1 0 1
डीएसपी 6 5 1
इंस्पेक्टर 17 16 1
एसआई 71 54 17
एएसआई 94 53 41
हेड कांस्टेबल 193 152 41
कांस्टेबल 953 559 394
महिला इंस्पेक्टर 1 1 0
महिला एएसआई 14 4 10
महिला हेड कांस्टेबल 22 12 10
महिला कांस्टेबल 87 38 49
महिला थाना भी राम भरोसे
जिला महिला थाने में एक इंस्पेक्टर व एक एसआई है ऐसे में कई बार महिलाओं पर होने वाले अपराधों को रोकने के लिए पुलिस बल की काफी जरूरत होती है लेकिन तत्काल में महिलाओं को संरक्षण देने के लिए पुलिस को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में जिला महिला थाना स्टाफ के अभाव में राम भरोसे ही है।
अवैध माइनिंग को रोकना बड़ा चैलेंज
नूंह जिले की सीमाएं कई राज्यों से लगती है। दूसरी ओर जिले का बहुत बड़ा भूभाग अरावली क्षेत्र से घिरा हुआ है। स्टाफ के अभाव में अवैध माइनिंग को रोकना पुलिस के लिए मुश्किल ही नहीं नामुुमकिन है। ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पुलिस विभाग में पदों का भरा जाना बहुत जरूरी है।
मजबूरी में होमगार्ड का लेना पड़ता है सहारा
पुलिस महकमे में स्टाफ के अभाव के कारण होमगार्ड के जवानों का सहारा लेना पड़ रहा है। होमगार्ड सिर्फ बाहरी कार्य तक सीमित रह सकते हैं लेकिन कार्यालयों के अलावा पुलिस के अन्य कार्य वह नहीं कर सकते।
जर्जर गाड़ियां भी दे रहीं धोखा
पुलिस जवानों के पास थानों व चौकियां में गाड़ियों का अभाव है या फिर कई गाड़ियां पुरानी हो चुकी है ऐसे में इन गाड़ियों से अपराधियों तक पहुंचना पुलिस के लिए काफी मुश्किल होता है। कई बार विभाग के उच्चाधिकारी को इस बारे में अवगत कराया गया है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है।
विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है। हमारे पास भले ही स्टाफ का अभाव है लेकिन अपराध को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पुलिस दिन रात कार्यरत है। जिले में अपराध व अपराधी को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- वरुण सिंगला, पुलिस अधीक्षक