नोएडा। सरकारी आंकड़ों पर यकीन करें तो जिले में डेंगू के मामलों में कमी आई है। अस्पतालों में बने डेंगू के वार्ड में बेड भी खाली हो रहे हैं, लेकिन अब अस्पतालों में सांस की तकलीफ से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण अस्थमा के गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करना पड़ रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि तीन दिन में डेंगू के मरीजों की संख्या पांच से कम रही है। बुधवार को दो नए मरीजों की पुष्टि हुई है। फिलहाल, सात सक्रिय मरीज हैं। कुल मरीजों की संख्या 623 दर्ज की जा चुकी है। डेंगू से दो मौत की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग कर चुका है। हालांकि, संदिग्ध मरीजों की मौत का आंकड़ा 15 से अधिक हो गया है। डेंगू से राहत मिलनी शुरू हुई है तो प्रदूषण की वजह से अस्पतालों में सांस, दिल व फेफड़ों से संबंधित परेशानियां लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में सितंबर के मुकाबले 50 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।
बच्चों में फ्लू के लक्षण को हल्के में न लें
कोरोना के मामलों में कमी के बीच बढ़ती ठंड के कारण फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों में फ्लू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनमें ज्यादातर बच्चे हैं। फेलिक्स अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि फ्लू का वायरस भी छींकने या खांसने से एक से दूसरे तक पहुंचता है। बच्चे को खांसी, जुकाम या बुखार होने पर हल्के में नहीं लेना चाहिए। लक्षण दिखने पर बच्चे को घर से बाहर न निकलने दें। कोरोना के कारण लंबे समय से बच्चे घरों से बाहर नहीं निकले थे, इसलिए फ्लू के मामले बेहद कम थे, लेकिन जैसे-जैसे पाबंदियां हटनी शुरू हो रही हैं। रोजाना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। राहत की बात यह है कि फ्लू से पीड़ितों का कोविड टेस्ट निगेटिव आ रहा है। बच्चे पांच से छह दिन के सामान्य इलाज से ही ठीक हो रहे हैं। हालांकि, फ्लू से पीड़ित छह महीने तक के बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।