नोएडा। जिले में डेंगू का डंक तेजी से बढ़ रहा है। 17 सितंबर तक डेंगू के 13 मामले थे, जो छह दिनों में बढ़कर 21 हो गए हैं। हालांकि, जिला स्वास्थ्य विभाग को केवल सरकारी अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों से ही डेंगू के मरीजों की जानकारी मिल रही है। इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे निजी अस्पताल विभाग को डेंगू संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। नजदीकी जिलों में बुखार, डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों के बाद जिले को भी हाई रिस्क जोन में रखा गया है। पिछले दिनों लखनऊ से आई टीम ने डेंगू से निपटने की तैयारियों का जायजा भी लिया था। निजी व सरकारी अस्पतालों को डेंगू पीड़ित मरीजों की सही रिपोर्टिंग के निर्देश अधिकारियों को दिए गए थे, फिर भी अस्पतालों की तरफ से जानकारी मुहैया नहीं कराई जा रही है।
अस्पतालों में मरीज, रिकॉर्ड से गायब
15 सितंबर को जारी रिपोर्ट के अनुसार जिम्स में 154 संदिग्धों की रैपिड जांच में 16 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई जबकि चाइल्ड पीजीआई नोएडा में 59 संदिग्धों की एलाइजा जांच में 5 बच्चों में डेंगू की पुष्टि हुई। हालांकि, जिला अस्पताल की केंद्रीय लैब ने केवल दो मरीजों की पुष्टि की थी। इस लिहाज से डेंगू के 23 मरीज दस दिन पहले ही थे। इनमें नए आठ मरीज जोड़े जाएं तो आंकड़ा 31 पहुंचता है। वहीं, जिला अस्पताल में शनिवार के बाद तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनका इलाज चल रहा है, इन्हें भी जोड़ा जाए तो संख्या 34 हो जाती है।
मलेरिया विभाग की बड़ी लापरवाही
जिले में डेंगू, मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है, लेकिन मलेरिया विभाग लापरवाही की नींद सोया हुआ है। विभाग डेंगू, मलेरिया से जुड़े मामलों का सही आंकड़ा तक नहीं जुटा पा रहा है। पिछले दिनों दिमागी बुखार के तीन संदिग्ध मरीज मिले थे, लेकिन मलेरिया विभाग ने बिना जांच ही इन मरीजों को दिमागी बुखार से पीड़ित मानने से इनकार कर दिया है।
मलेरिया के 23 व डेंगू के 21 मरीज रिकॉर्ड में दर्ज हैं। स्वास्थ्य केंद्रों से ताजा रिपोर्ट मांगी गई है, जो अब तक नहीं मिली है। दिमागी बुखार का जिले में कोई मरीज नहीं है। - डॉ. राजेश शर्मा, जिला मलेरिया अधिकारी