कंबोडिया में बैठकर 100 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के जाल में फंस चुके भारतीय युवकों को वहां से निकालने की कवायद में पुलिस जुट गई है। पुलिस कंबोडिया दूतावास के माध्यम से उस जगह की जानकारी जुटा रही है जहां से ठगी करने वाले गिरोह के लोग अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस अब इन युवकों को गिरोह के सदस्य के रूप में नहीं बल्कि पीड़ित के रूप में देखेगी और ठगों के राज खुलवाएगी। दरअसल, 20 से 30 युवकों को कंबोडिया में नौकरी के नाम पर भेजा गया है। उनमें गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा-दादरी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के युवक शामिल हैं।
कमिश्नरेट पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में यह जानकारी करें कि किस परिवार से युवक नौकरी करने कंबोडिया गए है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत अन्य राज्यों की पुलिस को भी इस संबंध में अवगत कराया गया है।
पुलिस की ओर से कंबोडिया की उड़ान भरने वाली एयर लाइनों से भी संपर्क साधा गया है कि वह एक वर्ष के भीतर नौकरी के लिए गए युवाओं के विषय में कुछ जानकारी दे। मंगलवार को पुलिस ने इस मामले में मुख्य सरगना चीन में अन्हुई प्रांत के शुजू सिटी निवासी शू यूमिंग, नेपाल के जिला खोरखा स्थित गांव मुच्चोक निवासी अनिल थापा और दादरी के गांव कटहैरा निवासी विनोद उर्फ अगस्त्या भाटी को गिरफ्तार किया था।