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UP: कंबोडिया में कहां से चलाते हैं गिरोह, जानने दूतावास पहुंची पुलिस; गैंग के जाल में फंसे भारतीय युवकों को...

Wed, 06 Mar 2024 09:03 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

कंबोडिया में बैठकर भारत के लोगों से 100 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तीन लोगों को सोमवार को बिसरख पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें एक चीनी, एक नेपाली और एक भारतीय शामिल है।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कंबोडिया में बैठकर 100 करोड़ से ज्यादा की साइबर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के जाल में फंस चुके भारतीय युवकों को वहां से निकालने की कवायद में पुलिस जुट गई है। पुलिस कंबोडिया दूतावास के माध्यम से उस जगह की जानकारी जुटा रही है जहां से ठगी करने वाले गिरोह के लोग अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। 
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पुलिस अब इन युवकों को गिरोह के सदस्य के रूप में नहीं बल्कि पीड़ित के रूप में देखेगी और ठगों के राज खुलवाएगी। दरअसल, 20 से 30 युवकों को कंबोडिया में नौकरी के नाम पर भेजा गया है। उनमें गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा-दादरी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के युवक शामिल हैं। 

कमिश्नरेट पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में यह जानकारी करें कि किस परिवार से युवक नौकरी करने कंबोडिया गए है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत अन्य राज्यों की पुलिस को भी इस संबंध में अवगत कराया गया है। 
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पुलिस की ओर से कंबोडिया की उड़ान भरने वाली एयर लाइनों से भी संपर्क साधा गया है कि वह एक वर्ष के भीतर नौकरी के लिए गए युवाओं के विषय में कुछ जानकारी दे। मंगलवार को पुलिस ने इस मामले में मुख्य सरगना चीन में अन्हुई प्रांत के शुजू  सिटी निवासी शू यूमिंग, नेपाल के जिला खोरखा स्थित गांव मुच्चोक निवासी अनिल थापा और दादरी के गांव कटहैरा निवासी विनोद उर्फ अगस्त्या भाटी को गिरफ्तार किया था।

बुधवार को इन्हें सीजेएम की अदालत में पेश किया गया, जहां से इन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस की ओर से रिमांड याचिका भी प्रस्तुत की गई है।

ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या एक हजार से अधिक होने की संभावना 
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जो लोग ठगी का शिकार हुए हैं उनकी संख्या एक  हजार तक हो सकती है। ठगी की रकम भी 200 करोड़ से अधिक होगी। वास्तविक संख्या डाटा के एनालिसिस के बाद ही पता चल सकेगी।
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इसके लिए अगर एडवांस तकनीक की जरूरत पड़ी तो गुरुग्राम, बेंगलुरु या हैदराबाद के विशेषज्ञों की भी सेवाएं ली जाएंगी। पुलिस की कोशिश होगी कि इस केस में पीड़ितों की रकम वापसी अगर संभव हो तो वह भी  कराई जा सके।
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