नोएडा (योगेश शर्मा)। जनपद में एक जनवरी को कोरोना के 131 केस मिले थे, जबकि कंटेनमेंट जोन की संख्या 10 से कम थी। तीन सप्ताह में ही संक्रमितों का आंकड़ा 26 हजार पार हो गया है। जिले में कंटेनमेंट जोन की संख्या बढ़कर 200 से ज्यादा हो गई है। तीसरी लहर में हर गली-मोहल्ले में कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। पहली और दूसरी लहर में संक्रमण प्रभावित इलाकों में सख्त पाबंदियां लागू की गई थीं, लेकिन इस बार संक्रमण को कमजोर मानकर लापरवाही बरती जा रही है। संक्रमण तेजी से बढ़ने की वजह भी यही मानी जा रही है।
इस बार नोएडा-ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियां कोरोना के लिहाज से हॉट स्पॉट बनी हुई हैं। सोसाइटियों के मुकाबले सेक्टरों और देहता क्षेत्र में संक्रमण की रफ्तार खासी कम है। एक जनवरी से अब तक जिले में 24,228 कोरोना के मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 85 फीसदी मरीज शहरी क्षेत्र के हैं, जबकि देहात की भागीदारी 15 फीसदी है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पीक पिछले साल 27 अप्रैल से 14 मई के बीच देखने को मिला था। इन 18 दिनों में 21,876 लोग कोरोना संक्रमित हुए थे। इस दौरान जिले में 100 से अधिक कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे। इस वर्ष एक जनवरी से कोरोना की तीसरी लहर शुरू हुई। तीसरी लहर का पीक 6 से शुरू हुआ, जबकि 23 जनवरी तक 25,164 कोरोना के केस दर्ज किए जा चुके हैं। इस बार कंटेनमेंट जोन की संख्या भी 200 से ज्यादा है। हालांकि, तीसरी लहर का पीक 1 से 15 फरवरी के बीच आने का अंदेशा जताया जा रहा है। लेकिन दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर के पहले पीक में 15 फीसदी अधिक संक्रमित मिलने से स्वास्थ्य महकमे की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि चुनावी सरगर्मियों के बीच फरवरी में दोबारा से यही हालात बने मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत 968 संक्रमित
बीते 24 घंटों में जिले में 968 संक्रमित पाए गए हैं। जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सक अधीक्षक डॉ. सुषमा चंद्रा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनीता रुइया की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। हालांकि बीते जिले में जांच का दायरा घटाकर आधे से भी कम कर दिया गया है। रविवार को जनपद में 3312 लोगों की जांच हुई। जिसमें सोमवार की रिपोर्ट में 968 नए मरीज मिले। जबकि शनिवार को 5322 लोगों की जांच में 969 और शुक्रवार को 4995 लोगों की जांच में 987 की रिपोर्ट पॉजिटिव रिपोर्ट मिली थी।
जांच के लिए सभी जगह स्थानीय पता जरूरी
आरटीपीसीआर जांच के लिए स्थानीय पते की अनिवार्यता हर जगह लागू कर दी गई है। सबसे पहले सेक्टर-30 स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय में यह नियम लागू किया गया था। हालांकि इससे लोगों की परेशानी काफी बढ़ी। अब चाइल्ड पीजीआई सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के दौरान स्थानीय पता मांगा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इससे संक्रमितों पर नजर रखना आसान होगा, क्योंकि दिल्ली या किसी अन्य जनपद के संक्रमित पाए गए मरीजों तक पहुंच पाना मुश्किल हो रहा था।
तीन सप्ताह में ऐसे बढ़ा ग्राफ
तारीख केस कंटेनमेंट जोन
1-7 जनवरी 3,379 20
8-14 जनवरी 11,356 120
15-23 जनवरी 11,948 200