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कोरोना काल ने बनाया लिखने में कच्चा, मोबाइल चलाने में पक्का

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नोएडा। लगातार दो वर्ष तक ऑनलाइन शिक्षा हासिल कर विद्यार्थी स्कूल लौट चुके हैं। ऑनलाइन शिक्षा की वजह से विद्यार्थियों में मोबाइल की आदत लग गई थी। अब स्कूल खुलने पर यह आदत जा रही है। ऑनलाइन शिक्षा के कारण छात्र-छात्राओं में लिखने की आदत भी कम हो गई थी। अब फिर से स्कूल जा रहे बच्चों में लिखने की आदत बन रही है।
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कोरोना संक्रमण के कारण सभी विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही थीं। विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प अच्छा लग रहा था। विद्यालय खुलने से विद्यार्थियों में अब ऑनलाइन शिक्षा और काम की आदत दूर हो रही है। शिक्षिका सविता सिंह ने बताया कि बच्चों में ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करने की आदत अब बदल रही है। असाइनमेंट के माध्यम से परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी हो जाती है। पहले पीडीएफ फॉर्म में इंटरनेट से कॉपी कर के विद्यार्थी असाइनमेंट बना रहे थे। स्कूल खुलने से अब वह कागज पर लिख कर असाइनमेंट बना रहे हैं। जिससे उनकी लिखने की आदत के साथ ही साथ विषय की जानकारी को याद रखने का अभ्यास हो जाता है। कोरोना काल में विभिन्न एप के माध्यम से बच्चों की ऑनलाइन क्लास चली। उन दिनों बच्चे कई घंटे मोबाइल, लैपटॉप व टैबलेट से चिपके रहते थे जो अब बदल रहा है।
ऑनलाइन के मुकाबले बच्चे ऑफलाइन में ज्यादा सीखते हैं। स्कूल में विद्यार्थी लिखने की आदत डाल रहे हैं। शिक्षक परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं। - मुकेश कुमार, प्रधानाचार्य केंद्रीय विद्यालय, सेक्टर-24
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जितना सीखने को ऑफलाइन कक्षा में मिलता है। उतना ऑनलाइन कक्षाओं में नहीं मिलता। कोरोना नियमों का पालन कर स्कूल जाता हूं। - संयम, छात्र
स्कूल आने से काफी उत्साहित हूं। दोस्तों के साथ पढ़ना अच्छा लग रहा है। ऑनलाइन में यह नहीं हो पा रहा था। लिखने की आदत बना रहा हूं। - शिवम, छात्र
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