नोएडा/ग्रेटर नोएडा। नोएडा-ग्रेनो में ग्रीन बेल्ट व सड़कों के किनारे पूरी तरह कंक्रीट से पटे होने के खिलाफ एक दाखिल याचिका पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी और सरकार के दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने पर जिलाधिकारी व नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ सहित अन्य को नोटिस जारी किया गया है। वहीं, कच्चे स्थानों पर लगीं टाइल्स, कंक्रीट आदि को हटाने और जो निर्माण किए जा रहे हैं उन्हें तत्काल रोकने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सड़क के किनारे और पेड़ों के आसपास व पौधे लगाने वाली जगहों से कंक्रीट हटाने की मांग वाली याचिका पर पर्यावरण मंत्रालय, यूपी सरकार, नोएडा प्राधिकरण व अन्य से दो माह में जवाब मांगा है। पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ और डॉ. सुप्रिया सरदाना की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, जो दावे यहां किए गए हैं वह एनजीटी अधिनियम 2010 की अधिसूची-1 में दिए गए सुझावों के अनुपालन नहीं किए जाने का सवाल उठाते हैं। इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
याचिकाकर्ताओं की दलील
पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड व डॉ. सुप्रिया सरदाना ने बताया कि नोएडा-ग्रेनो में एनजीटी के आदेशों व सरकार के दिशा निर्देशों के विपरीत जाकर लगातार कच्चे क्षेत्र ग्रीन बेल्ट, सड़क के किनारे, पेड़ों के आसपास और सेक्टरों में घरों के सामने कच्चे स्थान को टाइल्स लगाकर या सीमेंटेड कंक्रीट बिछाकर पक्का किया जा रहा है। इस संबंध में एनजीटी में डाली गई याचिका पर उनके अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पेड़ों के आसपास भी कच्चे स्थानों को कंक्रीट से पक्का कर दिया जाता है। कंक्रीट से बारिश का पानी जमीन में नहीं जा रहा है। इससे भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। साथ ही, बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या आती है, जबकि पेड़ों के आसपास कम से कम एक मीटर कच्चा स्थान छोड़ना चाहिए, लेकिन नोएडा-ग्रेनो में ऐसा नहीं किया जा रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
नोएडा-ग्रेनो के इन सेक्टरों का जिक्र
याचिका में जिन प्रभावित इलाकों का विशेष जिक्र किया गया है उनमें नोएडा के सेक्टर-28, 37, 47, 50, 55 और 62 शामिल हैं, जबकि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमेगा-1, पी-3 और अल्फा के नाम लिए गए हैं।
मूल स्थिति में करनी होगी क्षेत्र की बहाली
याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने निर्धारित सीमा से अधिक सड़कों पर कंक्रीट को हटाकर उन क्षेत्रों को मूल स्थिति में बहाल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कच्चे स्थानों पर झाड़ियां, घास व अन्य वनस्पतियां लगाने को कहा है। जहां पेड़ लगे हैं, उनके चारों ओर कंक्रीट को हटाने की हिदायत भी दी गई है।
लोधी गार्डन की तर्ज पर रखें कच्चे स्थान
विक्रांत तोंगड़ ने बताया कि नियमानुसार पार्क में केवल पांच फीसदी पक्का स्थान रहना चाहिए, लेकिन जिले में लगातार कच्चे स्थानों को टाइल्स आदि लगाकर पक्का किया जा रहा है। इससे पेड़-पौधों तक पानी नहीं पहुंच पाता। नई दिल्ली के लोधी गार्डन की तर्ज पर जिले में भी कच्चे स्थान, ग्रीन बेल्ट, मार्ग किनारे की जगह को छोड़ना चाहिए। अगर बहुत ही आवश्यकता हो तो वहां बदरपुर या फिर पोरस टाइल्स लगानी चाहिए। इनसे पानी पर जमीन पर जाने से रोक नहीं लगेगी।
नोएडा में 250 किमी दायरे में बिछ चुकी टाइल्स
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि शहर को डस्ट फ्री जोन बनाने के लिए अब तक सड़कों के दोनों ओर 250 किलोमीटर के दायरे में टाइल्स बिछा दी गई हैं। नए सेक्टरों में 100 किमी के दायरे में इसका काम किया जा रहा है। सड़क किनारे बालू पर टाइल्स लगाई जाती हैं, ताकि भूजल स्तर पर असर न पड़े।