ग्रेटर नोएडा। चिटहेरा भूमि घोटाले के प्रकाश में आने के बाद ग्रामीण मांग उठा रहे हैं कि गांव की भूमि पर वर्ष 1971 व 1976 में किए गए पट्टों की भी जांच की जानी चाहिए। गांव निवासी अधिवक्ता श्याम सिंह भाटी का कहना है कि अब तक केवल 1997 में किए गए पट्टों की जांच की गई है। अगर इससे पहले किए गए पट्टों की जांच की जाएगी, तो इससे भी बड़ी धांधली उजागर होगी। इससे कई बड़े और नए आरोपियों के नाम उजागर होंगे।
श्याम सिंह भाटी का कहना है कि उन्होंने गांव में 1971 व 1976 में हुए पट्टों की जांच के लिए अधिकारियों को पत्र लिखे हैं और ट्विटर पर भी मांग की है। उनका कहना है कि जो भूमि पट्टे 1971 से 2018 तक संक्रमणीय नहीं हो पाए तो 2019 में एसडीएम दादरी द्वारा किसके दबाव में आकर यह पट्टे संक्रमणीय कर दिए गए। वहीं इसी गांव में 1976 में भी कुछ आवासीय पट्टे आवंटित किए गए थे जिनका राजस्व में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस जमीन पर लोगों द्वारा मकान बना लिए गए हैं, लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारियों का इन पट्टों की तरफ आज तक भी ध्यान नहीं गया है। इन भूमि पर मकान आदि का निर्माण भी कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में कुछ लोगों को बचाने की कोशिश प्रशासन द्वारा की जा रही है। एक तरह के ही अपराध में दो तरह की जांच क्यों हो रही है, यह सबसे बड़ा सवाल है। यदि जिला प्रशासन के अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करते हैं तो इस पूरे मामले की शिकायत उच्चस्तरीय अधिकारियों से की जाएगी।