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चाइल्ड पीजीआई में ग्लूटेरिक एसिडेमिया ग्रस्त बच्चे का होगा निशुल्क उपचार

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नोएडा। चार साल के यशराज को 15 दिन पहले अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा। परिजन उसे गंभीर स्थिति में सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई लेकर पहुंचे। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ रही थी, उसे वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों के आधार पर जांच कराई गई, जिसमें दुर्लभ बीमारी ग्लूटेरिक एसिडेमिया की पुष्टि हुई। देश में इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या करीब 30 है, जिसमें सबसे ज्यादा दिल्ली के एम्स में उपचाराधीन हैं।
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चाइल्ड पीजीआई के बाल रोग विभाग, मेडिकल जेनेटिक्स और डायटेटिक्स विभाग के चिकित्सकों की संयुक्त टीम बनाकर उपचार शुरू किया गया। मेडिकल हिस्ट्री में पता चला कि परिवार में इससे पहले दो बच्चों की मृत्यु इस तरह के विकार से हो चुकी है। जेनेटिक्स विभाग के डॉ. मयंक निलय ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण निशुल्क अनुवांशिक परीक्षण कराया गया और इसके परिणाम के अनुसार बच्चे का उपचार शुरू किया गया। दस दिन बच्चे को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉ. निलय ने बताया कि विश्व में एक लाख नवजात शिशुओं में से एक इस बीमारी से पीड़ित है। नवजात बच्चों में इस रोग की पहचान मुश्किल होती है। दो वर्ष से अधिक उम्र के बाद अचानक लक्षण उभरकर सामने आने लगते हैं।
रोग के उपचार में विशिष्ट आहार की आवश्यकता होती है। इसके जरिये दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं को रोका जा सकता है। मरीज की मृत्यु की आशंका भी कम रहती है। बच्चे को आजीवन आहार संशोधनों की आवश्यकता होगी। इसको देखते हुए रांची की एक संस्था डे फॉर्म से संपर्क किया गया, जिसने 9300 रुपये प्रति माह खर्च के फॉर्मूला फीड बच्चे को उपलब्ध कराने का काम किया। दवाओं पर उपयुक्त आहार से बच्चे की सेहत में काफी सुधार देखने को मिला है। जल्द ही बच्चे को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। डॉक्टरों की टीम में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह, डॉ. भानु, डॉ. वर्निका शामिल रहे।
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अनुवांशिक जांच इसलिए भी जरूरी
संस्थान के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि पश्चिमी देशों में नवजात बच्चों की अनुवांशिक जांच की जाती है, जिससे ऐसे विकारों का निदान तत्काल हो जाता है। भारत में जागरूकता के अभाव या खराब आर्थिक स्थिति के चलते अनुवांशिक जांच बेहद कम होती हैं। यही वजह है कि मेटाबोलिक विकारों के निदान में देरी हो रही है।
क्या है ग्लूटेरिक एसिडेमिया
यह एक अनुवांशिक बीमारी है जिसमें शरीर कुछ खास तरह के प्रोटीन को प्रोसेस करने में सक्षम नहीं होता। शरीर में ऑर्गेनिक एसिड असामान्य रूप से एकत्रित होने लगते हैं। इससे विशेषकर मस्तिष्क के उस हिस्से को क्षति पहुंचती है जिसे बैसल गैंगलिया कहा जाता है। बेसल गैंगलिया शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
बच्चे के सिर का आकार बड़ा तो जांच में नहीं करें देरी
इस बीमारी के लक्षण जन्म से कुछ महीने तक दिखाई नहीं देते, लेकिन कुछ बच्चों में सामान्य से बड़ा सिर (माइक्रोसेफली) की समस्या हो सकती है। ऐसे में बच्चे के सिर का साइज सामान्य से बड़ा है तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
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