-गर्मी की छुट्टियों में पहली बार प्राइमरी के बच्चों के लिए समर कैंप
-फुटबॉल, शतरंज, बैडमिंटन, खोखो, कबड्डी, योग सीख रहे बच्चे
-एमसीडी के 10 क्लस्टर्स में सुबह 7.30-9.30 बजे लग रही क्लास
आदित्य पाण्डेय
नई दिल्ली।
समर कैंप में बच्चे फुटबॉल से टैकलिंग (चुनौती से निपटना), स्लाइडिंग (फुटबॉल को लेकर आगे बढ़ना) सीख रहे हैं तो दूसरी तरफ शतरंज जैसे खेल से रणनीति बनाना, धैर्य रखना, सही निर्णय लेना और सटीक चाल चलना सीख रहे हैं। कबड्डी, खोखो, थ्रो बॉल, बास्केट बॉल, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स में भी दांव आजमा रहे हैं। यहां बच्चों के दिमाग को शांत और एकाग्र बनाए रखने के लिए योग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
एमसीडी ने इस बार गर्मी की छुट्टियों में पहली बार अपने प्राइमरी स्कूलों के बच्चों के लिए समर कैंप आयोजित किया है। पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली में कुल 10 से ज्यादा क्लस्टर्स में समर कैंप लगाया गया है, जो कि 30 जुलाई तक चलेगा। इसमें एक हजार से ज्यादा बच्चे हिस्सा ले रहे हैं। यहां इन्हें सुबह 7.30 बजे से 9.30 बजे तक दो घंटे विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एमसीडी शिक्षा विभाग के स्पोर्ट्स विंग के अधिकारियों के मुताबिक बच्चों को खेलने के सभी जरूरी सामान और जितने खेल उतने टीचर्स भी उपलब्ध कराए गए हैं।
स्टेट व नेशनल गेम तक ले जाने की तैयारी
स्पोर्ट्स विंग के अधिकारियों के मुताबिक एमसीडी स्कूलों के बच्चे जोश और आक्रमकता से भरपूर हैं। एनर्जिएटिक बच्चों की पहचान कर इन्हें खेलों की तरफ प्रेरित किया जा रहा। सभी 1535 से अधिक स्कूलों से एक हजार से ज्यादा बच्चे खोज निकाले गए गए हैं, जिन्हें समर कैंप में शामिल किया जा रहा है। इन्हें स्टेट और नेशनल गेम तक लेकर जाने की तैयारी है। एमसीडी की पोचनपुर फुटबॉल टीम स्टेट में अच्छा खेल रही।
10 से ज्यादा क्लस्टर्स बनाए
निगम ने शांति देसाई स्पोर्ट्स क्लब मोरी गेट, भगत सिंह स्टेडियम रोहिणी, ककरौला स्टेडियम द्वारका, खाटू श्याम स्टेडियम मादीपुर, दल्लूपुरा, गाजीपुर, रानी झांसी केशवपुरम, सत्यवती ग्राउंड, करावल नगर, पोचनपुर, ईश्वर कॉलोनी नरेला, शाहबाद डेयरी, जहांगीरपुरी और बादली में क्लस्टर बनाए हैं, जहां पर बच्चों को विभिन्न खेलों की ट्रेनिंग दी जा रही है। निगम के स्पोर्ट्स विंग के मुताबिक जल्द ही चार नए क्लस्टर्स बढ़ाए जाएंगे।
सबसे पहले बच्चे करते हैं वार्मअप
समर कैंप में सुबह सबसे पहले दौड़ लगाकर, रस्सियां खिंचवाकर बच्चों का वार्मअप किया जाता है। इसके बाद तरह-तरह के खेलों में हिस्सा लेते हैं। बच्चे फुटबॉल को पैरों पर बैलेंस बनाना सीखते हैं, ग्राउंड पर फुटबॉल के साथ आगे बढ़ने की का सीखते हैं। कबड्डी में जोर आजमाइश करते हैं। बास्केट बॉल और टेबल टेनिस में टाइमिंग और फुर्ती दिखाते नजर आते हैं। कुछ बच्चे शतरंज में अपने मोहरों की स्थिति का सुधार करते दिखते हैं।