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किराये पर वाहन देने का करार कर ठगी, कंपनी की महिला एमडी गिरफ्तार

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आरोपी की ​​​निशानदेही पर बरामद वाहन।
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नोएडा। अस्पतालों, कॉल सेंटर और कंपनियों में किराये पर वाहन लगाने के नाम पर ठगी करने वाली कंपनी की महिला एमडी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शनिवार को सेक्टर-62 से गिरफ्तार मूल रूप से दिल्ली निवासी मलिका कोले से पूछताछ कर गिरोह के अन्य आरोपियों की जानकारी जुटाई जा रही है। महिला की निशानदेही पर 7 आर्टिगा और 2 इनोवा बरामद की गई हैं।
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ठगी करने वाली कारजीनिया मल्टी सर्विस कंपनी किराये पर वाहन चलाने के एवज में निवेशकों को 22 हजार रुपये प्रति माह देने का करार करती थी। कंपनी की ओर से दो से चार माह तक गाड़ी की किस्त और गाड़ी मालिक को 22 हजार रुपये किराया दिया जाता था। इसके बाद कंपनी किस्त और किराया देना बंद कर देती थी।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि 5 अगस्त को इंदिरापुरम निवासी देवकांत सिंह और योगेेंद्र कुमार चौधरी ने शिकायत दी थी। शिकायत के मुताबिक सेक्टर-142 की कारजीनिया मल्टी सर्विस कंपनी ने बीएस-6 कार के लिए विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन पढ़कर उन्होंने आरोपियों से संपर्क किया। अस्पताल, कॉल सेंटर और कंपनियों में गाड़ी किराये पर लगाने के एवज में 22 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने की बात कही गई। यह भी बताया कि गाड़ियों की किस्त और मेंटेनेंस भी कंपनी वहन करेगी। आरोपियों ने दो इनोवा के लिए 21-21 हजार रुपये जमा किए। कंपनी की ओर से दोनों से 4.50-4.50 लाख लेकर किस्त पर इनोवा खरीदी गईं। दो माह के बाद बैंक की किस्त जमा नहीं होने पर देवकांत और योगेंद्र कंपनी पहुंचे। आरोपियों ने बताया था कि उनकी गाड़ी को फोर्टिस अस्पताल में लगाया जाएगा। वह अस्पताल पहुंचे वहां पार्किंग में उनकी कारें खड़ी थीं। उन्होंने कई दिन बाद जाकर देखा तो कारें वहीं खड़ी मिली। दोनों ने फिर पुलिस से इसकी शिकायत की। पुलिस कंपनी की सेक्टर-75 अंतरिक्ष गोल्फ व्यू सोसाइटी में निवासी कंपनी की एमडी मलिका कोले को हिरासत में लेकर पूछताछ की। महिला की निशानदेही पर दो इनोवा और 7 अर्टिगा बरामद की गई।
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दो और कंपनियां भी थीं, सहयोगियों की तलाश शुरू
पुलिस पूछताछ में मलिका कोले ने बताया कि उसकी एक्स ट्रेवल्स और स्वास्तिक नाम से दो और कंपनियां थीं। तीनों कंपनियों ने करीब 100 कारें खरीदकर बंगाल भेजी गई थीं। महिला तरुण गुप्ता, सुधांशु मिश्रा, मृत्युंजय शुक्ला और अलका पांडेय के साथ मिलकर कंपनी चलाती थी। कुछ माह पहले ही नोएडा में कंपनी खोली गई थी। पुलिस सहयोगियों की तलाश में जुट गई है।
दो तीन माह तक किस्त और किराया देने के बाद हो जाते थे फरार
आरोपी एमडी ने बताया कि निवेशकों से अर्टिगा कार के एवज में ढाई लाख रुपये और इनोवा के साढ़े चार लाख रुपये लिए जाते थे। जबकि फॉरच्यूर्नर के लिए 6.50 लाख रुपये लिए जाते थे। दो-तीन माह तक किराए और किस्त के पैसे देने के बाद कंपनी वाहन लेकर फरार हो जाती थी
65 की उम्र के नाम के शख्स का रजिस्ट्र्रेशन, युवा की लगाई फोटो
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि जिस व्यक्ति के नाम से कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा रखा है, उसकी उम्र 65 साल है। जबकि फोटो 30 साल के युवा का लगा रखा है। एडीसीपी ने इस पूरे मामले की जांच एसीपी रजनीश वर्मा को दी है।
बंगाल क्यों भेजते थे वाहन इसकी हो रही है जांच
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि बंगाल में गाड़ियां बेची जाती थीं या किसी अन्य काम में लगाई जाती थीं। उन्होंने कहा कि करीब 100 वाहनों का रिकॉर्ड अब तक मिल चुका है। जिसकी तलाश की जा रही है। सभी कारें बिलकुल नई थीं।
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