ग्रेटर नोएडा। सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा के शिलापट्ट पर गुर्जर शब्द और बाद में मुख्यमंत्री व अन्य भाजपा नेताओं के नाम पर काला पेंट करने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा नेताओं के नाम पर काला पेंट करने पर दर्ज किए गए केस के बाद अब गुर्जर शब्द पर काला पेंट करने वालों पर भी मामला दर्ज करने की आवाज उठने लगी है।
राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान समिति के सदस्यों का कहना है कि पुलिस मुकदमे और जेल के नाम से नेताओं को डराकर आंदोलन को शांत करना चाहती है, लेकिन इससे चिंगारी और भड़क रही है। प्रतिमा कॉलेजों का संचालन करने वाली गुर्जर विद्या सभा ने समाज के लोगों की मदद से बनवाकर लगवाई है। मुख्यमंत्री को इस उम्मीद के साथ बुलाया गया था कि वह कॉलेज के लिए कुछ धनराशि देकर जाएंगे और यहां विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा करेंगे, लेकिन सहायता देने की जगह शिलापट्ट पर लिखा गुर्जर शब्द हटा दिया। समाज की मांग है कि मुख्यमंत्री और सरकार समाज से माफी मांगें और यह स्वीकार करें कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर थे। अन्यथा आगामी चुनाव में पूरे भारत का गुर्जर समाज भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार करेगा।
वहीं, अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ने गुर्जर शब्द पर काला पेंट करने वालों पर कार्रवाई व केस दर्ज कर जांच की मांग उठाई है। वहीं, अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह भाटी ने फेसबुक पर लिखा है कि 21 सितंबर को गुर्जर शब्द पर काला पेंट करने वालों पर मुकदमा कब होगा।
बड़े आंदोलन की रूपरेखा कर रहे तैयार
राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान समिति के राजकुमार भाटी का कहना है कि चिटहेरा गांव में हुई पंचायत के बाद पुलिस ने 148 नामजद और 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 148 लोगों में विभिन्न पार्टियों से जुड़े हुए समाज के जिम्मेदार और प्रमुख लोग शामिल हैं। इससे पूरे गुर्जर समाज में आक्रोश है और वह बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
करणी सेना भी बना रही रणनीति
करणी सेना के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष करण सिंह का कहना है कि सीएम के नाम पर काला पेंट करने वालों पर कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन दिया जा चुका है। अगर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो वह आगे की रणनीति बनाएंगे, फिलहाल पुलिस गिरफ्तारी व दबिश दे रही है।