ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) के न्याय निर्णायक अधिकारी (लखनऊ) की कोर्ट ने शाहबेरी के खरीदारों के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने माना है कि शाहबेरी के खरीदारों का मानसिक उत्पीड़न हुआ है। अवैध फ्लैटों का बैनामा कराकर कब्जा देने से नुकसान भी हुआ है। ऐसे में खरीदार हर्जाना पाने के हकदार हैं। अधिकारी ने पांच शिकायतों पर बिल्डर को फ्लैट की कुल कीमत का दस-दस प्रतिशत हर्जाना खरीदारों को देने का आदेश दिया है। पैसे नहीं देने पर बिल्डरों से वसूली की जाएगी।
शाहबेरी के खरीदार विवेक चौधरी, जगदीप सिंह, अरविंद कुमार, नूपुर पाठक और अंगदप्रीत सिंह ने न्याय निर्णायक अधिकारी की कोर्ट में अपील की थी। सभी ने फ्लैट पर देरी से कब्जा, गलत सूचना देने, दोषपूर्ण स्वामित्व और मानसिक उत्पीड़न के नुकसान की भरपाई कराने की शिकायत की थी। सभी शाहबेरी के जसबीर मान बिल्डर के प्रोजेक्ट के खरीदार हैं।
ग्रेटर नोएडा में अधिक बोझ होने के कारण सभी केस को न्याय निर्णायक अधिकारी (लखनऊ) भेज दिया गया। करीब एक साल सुनवाई करने के बाद अधिकारी ने आदेश दिया है कि खरीदारों को फ्लैट की कीमत की 20 प्रतिशत धनराशि हर्जाने में दी जाएगी। इसमें दस प्रतिशत मानसिक उत्पीड़न और दस प्रतिशत धनराशि क्षतिपूर्ति की होगी। बिल्डर को आदेश के बाद 45 दिन के अंदर यह धनराशि देनी होगी। इसके बाद वसूली की जाएगी। इस पर बिल्डर को ब्याज भी देना होगा। सभी खरीदारों को 2.25 लाख से 4 लाख तक का मुआवजा मिलेगा।
जमीन पर नहीं है बिल्डर का स्वामित्व
यूपी रेरा की कोर्ट ने माना कि बिल्डर के पास विधिक रूप से भूमि का स्वामित्व नहीं है तब भी उस पर अपार्टमेंट बना दिया। किसी भी प्राधिकरण की तरफ से मानचित्र स्वीकृत नहीं किया गया। साथ ही, बिल्डर की तरफ से मौखिक पक्ष रखा गया कि यूपी रेरा में प्रोजेक्ट पंजीकृत है, जबकि यूपी रेरा के सचिव ने जानकारी दी कि सितंबर, 2019 में यूपी रेरा के 16 प्रोजेक्टों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। वहीं, प्राधिकरण की रिपोर्ट से भी स्पष्ट है कि बिल्डर का अपार्टमेंट अवैध है। बिल्डर के खिलाफ केस भी दर्ज है। शाहबेरी की जमीन पर हाईकोर्ट की यथा स्थिति का भी आदेश है। बता दें कि जुलाई, 2018 में शाहबेरी गांव में दो बहुमंजिला इमारत गिर गई थी। हादसे में नौ लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद प्राधिकरण ने शाहबेरी में बनी सैकड़ों इमारतों को अवैध घोषित कर दिया था।
न्याय प्रणाली पर पूरा विश्वास है। यह फैसला आगे की कार्रवाई का मुख्य द्वार बनेगा। अब हर जगह पर सुनवाई हो सकेगी। खरीदारों को उनका हक मिलेगा।
- हरप्रीत अरोड़ा, शाहबेरी के खरीदारों के वकील