प्रशासन के बुलाने से भी नहीं आ रहे शाहबेरी के बिल्डर
ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन के बुलाने पर भी शाहबेरी गांव के बिल्डर सामने नहीं आ रहे हैं। इससे बिल्डरों से मकान खरीदने वाले निवेशकों की परेशानी बढ़ गई है। लगातार दूसरी बार जिला प्रशासन के नोटिस को दरकिनार कर बिल्डरों ने आने से इनकार कर दिया है।
खरीदारों ने बताया कि बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद शाहबेरी के अवैध व खतरनाक घरों के बदले आठ किलोमीटर की परिधि में निवेशकों ने सुरक्षित घर की मांग की थी। इस पर जिला प्रशासन ने शाहबेरी गांव के बिल्डरों को नोटिस भेज कर तलब किया था। पहली बैठक में बिल्डर नहीं पहुंचे थे। इसके बाद एडीएम वित्त की अध्यक्षता में बिल्डरों को दोबारा 19 फरवरी को बुलाया गया था। फिर भी वह नहीं पहुंचे। दो मार्च को इन्हें एक बार फिर बुलाया गया है। खरीदार मीना महापात्रा, अभिनव खरे व सचिन राघव ने बताया कि खरीदारों ने एडीएम वित्त से कहा कि शाहबेरी गांव 1994 से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में है। जून 2013 से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबित है। भूमि अधिग्रहण एक्ट की धारा 4 व 6 की कार्रवाई हो चुकी है। धारा 4 के बाद रजिस्ट्री शून्य है। 16 अक्तूबर 2014 को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शाहबेरी की 25 याचिकाओं पर स्टे का आदेश दिया था। बावजूद लगभग 500 अवैध बहुमंजिला इमारतें बन गईं और बैंकों ने आरबीआई के नियमों का उल्लंघन कर लगभग 1400 करोड़ का होम लोन भी बांट दिया। खरीदारों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर आशियाना बचाने की गुहार लगाई है।