नोएडा। एनसीआर में प्रदूषण के कारण सांसों पर संकट बना है। वहीं, सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे जुगाड़ और खटारा वाहनों से हवा जहरीली हो रही है। इसके बावजूद भी परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हद तो तब है जब अधिकारियों के सामने ही खटारा वाहन और जुगाड़ धुआं उड़ाते हुए निकले जाते हैं। इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। देशभर में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नोएडा के शामिल रहने का एक कारण यह भी है।
जिले में करीब 8 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 88 हजार वाहन ऐसे हैं जो 10 और 15 साल की समयसीमा पूरी कर चुके हैं, लेकिन परिवहन विभाग व यातायात पुलिस इन पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करती है। बीते दो माह में चंद वाहनाें पर ही कार्रवाई की गई है। जबकि ,सैकड़ों वाहन रोज सड़कों पर दौड़ते हैं। बीते कई दिनों से प्रदूषण के मामले में नोएडा देश में टॉप-5 की सूची में बना हुआ है। शहरवासियों ने भी प्रदूषण फैलाने वाले 10 से 15 साल पुराने वाहनों पर कार्रवाई मांग की है।
इसी तरह शहर में खटारा वाहन दौड़ते दिख जाएंगे। ऑटो, बस और ट्रक सैकड़ों ऐसे हैं जिनकी समयसीमा पूरी नहीं हुई, लेकिन यह सड़कों पर चलने लायक नहीं है। ऐसे वाहन कब कहां खडे़ हो जाएं और किसे नुकसान पहुंचा दें, कोई भरोसा नहीं है। इन पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि जब से फिटनेस प्रमाणपत्र दो साल तक वैध हो गया है। उसी समय से खटारा वाहनों की संख्या सड़कों पर दिखने लगी है।
पुराने वाहनों और जुगाड़ को धड़ल्ले से मिल रहा ईंधन
साल-2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह ने पेट्रोल पंप पर केवल हेलमेट पहने लोगों को ईंधन देने का निर्देश दिया था। इसको पेट्रोल पंप संचालकों ने लागू किया था। कई पेट्रोल पंप पर आज भी दोपहिया सवारों को बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं दिया जाता है। वहीं, जुगाड़ और खटारा वाहनों को बिना रोकटोक के ईंधन दे दिया जाता है। जबकि, ये प्रदूषण फैलाने के मामले में अधिक खतरनाक हैं। अधिवक्ता रणपाल अवाना ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जुगाड़ वाहनों को बंद कराने की मांग की है।
विभाग की ओर से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 217 वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, ध्वनि प्रदूषण पहुंचाने वाले 9 वाहनों को जब्त किया गया है। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
- एके पांडेय, एआरटीओ प्रशासन