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किसानों की दो मांगों पर बोर्ड की मुहर, शासन को भेजा प्रस्ताव

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नोएडा। चार माह तक चला किसानों का आंदोलन आखिर रंग लाया। प्राधिकरण ने शुक्रवार को बोर्ड बैठक का आयोजन कर किसानों की कुछ मांगों का निस्तारण कर दिया। इन मांगों को बोर्ड ने मंजूरी के बाद अब शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। वहीं, किसान नेता सुखबीर खलीफा ने इसे किसानों की जीत बताते कहा है कि बाकी मांगों को अगली बोर्ड बैठक में रखने का आश्वासन प्राधिकरण अधिकारियों ने दिया है।
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प्राधिकरण कार्यालय के बाहर आंदोलनरत किसानों को आश्वासन दिया गया था कि बोर्ड बैठक में उनकी मांगों को उठाया जाएगा। इसके बाद किसान लौट गए थे। बृहस्पतिवार तक भी जब बोर्ड बैठक आयोजित नहीं की गई तो किसानों ने फिर से आंदोलन शुरू कर दिया था। शुक्रवार को भी किसान प्राधिकरण के बाहर प्रदर्शन करते रहे। इस कारण प्राधिकरण ने शाम को बोर्ड बैठक आयोजित की। इससे कोरोना संक्रमण के कारण इसमें सभी अधिकारी ऑनलाइन जुडे़। बैठक के बाद प्राधिकरण अधिकारियों ने किसानों को बताया कि उनकी दो मांगों को बोर्ड ने मंजूरी दी है। इसके बाद किसानों ने प्राधिकरण के बाहर धरने को स्थगित कर दिया और लौट गए।
किसानों की यह मांगे मानीं
1. किसानों की मुख्य समस्या आबादी की जमीन को लेकर थी। इसमें विनियमतिकरण की सीमा 450 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति से बढ़ाकर 1000 वर्ग मीटर प्रति व्यक्ति करने की मांग की जा रही थी। गांव के परिसीमन में आने वाली आबादी की जमीन पर एक व्यक्ति सिर्फ 450 वर्गमीटर तक का ही मालिक हो सकता था। अब बोर्ड बैठक में यह सीमा 1000 वर्गमीटर तक कर दी गई है। इससे सैकड़ों किसानों को फायदा होगा।
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2. किसानों को जमीन अधिग्रहण किए जाने पर प्राधिकरण की ओर से आवंटित होने वाले जमीन मालिक को 5 प्रतिशत आबादी के प्लॉट दिए जाते हैं। इन पर किसान अब व्यावसायिक गतिविधि (दुकानें आदि) संचालित कर सकेंगे। हालांकि, कितने प्रतिशत क्षेत्र पर व्यावसायिक गतिविधि करने का अधिकार होगा और उसकी रेट दर क्या होगी। इसे तय करने के लिए बोर्ड ने कमेटी बना दी है जो अगली बोर्ड बैठक में डिटेल रिपोर्ट सौंपेगी।
एकमुश्त समाधान योजना को बढ़ाया
बोर्ड बैठक में पूर्व में चल रही एकमुश्त समाधान योजना की अवधि को 31 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है। यह योजना 2016-17 तक ड्रॉ के माध्यम से बिल्टप हाउसिंग योजना के तहत आवंटनों के लिए थी। कोविड को ध्यान में रखते इस इस योजना को शुरू किया गया था, लेकिन किसानों के प्राधिकरण गेट पर धरने के कारण यह योजना भी प्रभावित हुई थी। अधिकारियों और कर्मचारियों के प्राधिकरण में प्रवेश न होने के कारण योजना को लाभ लाभार्थियों को नहीं मिल पाया था।
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