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दोपहर में अवतार सिंह भड़ाना ने चुनावी मैदान छोड़ा, रात को वापसी

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जेवर स्थित अवतार भड़ाना के चुनाव से हटने के बाद बंद पड़ा कार्यालय। संवाद - फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। कोरोना की बात कहकर बृहस्पतिवार दोपहर चुनाव नहीं लड़ने का एलान करने वाले जेवर से समाजवादी पार्टी-राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी अवतार सिंह भड़ाना की देर रात तक चुनावी मैदान में वापसी हो गई। एक ट्वीट के माध्यम से भड़ाना ने कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद चुनाव लड़ने की बात कही। इससे दिनभर चली सियासी गहमागहमी पर विराम लग गया।
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दरअसल, दोपहर में भड़ाना के वकील ने बताया था कि कोरोना होने से अवतार सिंह भड़ाना चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके नजदीकियों ने भी इस पर मुहर लगा दी थी। हालांकि, भड़ाना ने सीधे तौर पर जानकारी नहीं दी थी, लेकिन जेवर के चुनावी कार्यालय पर भी सन्नाटा पसर गया था, जबकि एक दिन पहले ही यहां भीड़ की वजह से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में भड़ाना पर एफआईआर हुई थी। जिले के एक नेता ने यहां तक दावा कर दिया था कि रालोद ने प्रत्याशी बना दिया है और वह शुक्रवार को नामांकन करेंगे, लेकिन देर रात भड़ाना के एक ट्वीट ने पूरे मामले को दूसरा रुख दे दिया।
उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘हमारे पूर्वजों का गौरवशाली इतिहास रहा है। चाहे कोई भी मैदान हो, समाज के लिए, उनके अधिकारों के लिए, गरीबों के लिए वीरता से जंग लड़ी है। कोरोना के शुरुआती लक्षण थे, लेकिन आरटीपीसीआर की रिपोर्ट में कोरोना नहीं है। अपनों के लिए चुनाव लड़ूंगा।’ इस ट्वीट को भड़ाना ने अखिलेश यादव और जयंत चौधरी को भी टैग किया है। वहीं, भड़ाना ने अमर उजाला से संपर्क कर बसपा से चुनाव लड़ने की चर्चाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे शुक्रवार से फिर से गठबंधन प्रत्याशी के रूप में प्रचार में करेंगे।
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बसपा से चुनाव लड़ने की हुई चर्चा
दोपहर में जैसे ही यह सूचना सोशल मीडिया पर वायरल हुई कि भड़ाना चुनाव नहीं लड़ेंगे तो जेवर में चौक चौराहों पर इसी बात की चर्चा होने लगी कि केवल कोरोना होने से भड़ाना चुनाव से नहीं भाग सकते। कहीं कुछ तो गड़बड़ है। शाम को राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा होने लगी कि भड़ाना जेवर से ही बसपा से चुनाव लड़ेंगे और शुक्रवार को नामांकन करेंगे। यह भी कहा गया कि जेवर से नहीं, बल्कि किसी और सीट से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं।
छापे के डर को बता रहे थे लोग वजह
बीते दिनों जिले में एक सपा नेता के घर पर पुलिस का छापा पड़ा था। उसे भी इस घटनाक्रम से जोड़ा जाने लगा। लोग तरह-तरह की बातें करने लगे। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना था कि भड़ाना से जुड़े लोगों पर छापे की गाज गिरने वाली है। यही वजह है कि कार्यकर्ताओं को बचाने और किसी तरह के विवाद में नहीं पड़ने देने से भड़ाना ने ऐसा फैसला किया।
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