अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश एक दलित विरोधी मानसिकता का परिणाम है। यह घटना बताती है कि देश की न्यायिक व्यवस्थाएं, सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारा खतरे में है।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएम ने कहा कि भगवा पार्टी अपने घृणित प्रचार के माध्यम से लगातार कमजोर और पिछड़े वर्गों के हितों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। राज्य सरकार त्योहारों के मद्देनजर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है और किसी को भी राज्य की शांति और सद्भाव को भंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
सीमावर्ती राज्य होने के कारण सूबे में कई विरोधी ताकतें सूबे की शांति, प्रगति और समृद्धि तथा कानून-व्यवस्था को भंग करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसी ताकतों के नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों में मिलावट पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इस पर लगाम लगाने के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। दिवाली के दौरान सावधानी बरतने का आग्रह करते हुए मान ने सभी नागरिकों से ग्रीन दिवाली मनाने की अपील की।
बाढ़ पर विपक्ष द्वारा सरकार की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते उन्होंने कहा कि विपक्ष हताश होकर पंजाब सरकार पर बेवजह आरोप लगा रहा है। बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है और राज्य में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के लिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि इस आपदा ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी भारी तबाही मचाई है। गिरदावरी की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही मुआवजे के चेक वितरित किए जाएंगे।
पंजाब सरकार बाढ़ से हुए भारी नुकसान पर अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप चुकी है। अब गेंद केंद्र के पाले में है और मोदी सरकार को बाढ़ प्रभावित राज्य को पटरी पर लाने के लिए उदारतापूर्वक धनराशि जारी करनी चाहिए। राज्य सरकार अपने स्तर पर बाढ़ प्रभावित जिलों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।