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आंगनबाड़ी वर्कर ने दिया धरना

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नूंह। लंबे समय से आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्परों की मांगों को सरकार द्वारा पूरा नहीं कराया जा रहा है। अपनी इन मांगों को पूरा कराने के लिए बुधवार को सैकड़ों आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर ने अपना अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के बारे में उपायुक्त शक्ति सिंह के माध्यम से प्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री के नाम के पत्र भी दिया।
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आंगनबाड़ी वर्कर एंड हैल्पर यूनियन की जिला प्रधान रीटा धारीवाल, जिला सचिव रवीना, जिला उप प्रधान जमशीदा, प्रेस सचिव कविता, उप सचिव नीरज ने बताया ने बताया कि उनकी 19 मुख्य मांगों को सरकार पूरा नहीं कर रहा है। जिनमें मुख्य रूप से आंगनबाड़ी वर्कर हैल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने के साथ न्यूनतम वेतन को 24 हजार व हैल्पर के लिए 16 हजार करना है। अन्य मांगों में 2018 के बाद की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते के सभी मानदेय का उनका लाभ दिया जाए। सभी को मोबाइल फोन दिए जाए। इसके अभाव में उनके ऑनलाइन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस बारे में उच्च न्यायालय ने भी उनका पक्ष माना है। प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2018 में वर्कर के लिए 1500 व हैल्पर के लिए 750 रूपये के एरियर का लाभ दिया जाए। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट होने के बाद वर्कर को 5 लाख व हैल्पर को 3 लाख की राशि का लाभ दिया जाए। आंगनबाड़ी वर्करों को सुपरवाइजर बनने पदोन्नति का लाभ दिया जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों का बढ़ा किराया ग्रामीणों क्षेत्रों में 2 हजार व शहरी व कस्बों में 3 हजार और शहरों में 5 हजार किया जाए। उनके समय-समय पर बैठकों में बुलाने पर टीए डीए का लाभ दिया जाए। 18 किलोमीटर से अधिक दूरी पर किसी को नहीं बुलाया जाए। उनको मेडिकल अवकाश का लाभ दिया जाए। मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हैल्पर की भर्ती की जाए। उनके लिए गर्मी सर्दी का अवकाश प्रदान किया जाए। ईंधन की राशि को बढ़ाया जाए। उनको गैस सिलेंडर भी विभाग प्रदान करें। लंबे समय से विभाग में खाली पड़े सभी पदों को भरा जाए। समय पर वेतन प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार उनके हितों की लगातार उपेक्षा कर रही है। जिससे उनको अनिश्चितकालीन धरने पर बैठना पड़ा है मांगों को पूरा नहीं होने तक उनका धरना जारी रहेगा।
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