सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन करतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
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ग्रेटर नोएडा। जिले की आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। आंगनबाड़ी कर्मचारियों का कहना है कि 5500 रुपये का मानदेय दिया जाता है, लेकिन काम एक लाख रुपये का लिया जा रहा है। यह शोषण है। धरने के बाद कर्मचारियों ने सीएम के नाम 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा है। आंगनबाड़ी, मिनी आंगनबाड़ी व सहायिका संगठन के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी सुबह कलेक्ट्रेट पर पहुंची। वहां दिनभर धरना दिया। जिलाध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों ने मोबाइल को वापस लेने की मांग की है। कहा है कि आठवीं पास महिलाएं कैसे मोबाइल पर काम कर सकती हैं। इसका प्रशिक्षण भी कर्मचारियों को नहीं दिया गया है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान हो या फिर राशन वितरण का काम, सभी में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को लगा दिया जाता है। पुनरीक्षण अभियान के तहत गरुड़ एप पर काम करना पड़ रहा है। रात एक बजे तक काम करते हैं। जबकि, उनको मोबाइल पर काम करना नहीं आता। सभी कर्मचारी छह दिसंबर से कलम बंद हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों ने मोबाइल को वापस लेने, अन्य प्रदेशों की तरह मानदेय देने, मानदेय को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़ने, सामाजिक सुरक्षा के लिए 300 करोड़ का आंगनबाड़ी कल्याण कोष बनाने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एकमुश्त दस लाख का वजीफा देने समेत कुल 11 मांग की है। अपनी मांगों का ज्ञापन डिप्टी कलेक्ट्रेट धर्मेंद्र कुमार को दिया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नहीं मिल रहा ठिकाना
कस्बे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोई ठिकाना नहीं मिल पा रहा है। इस कारण वह यहां-वहां बैठकर सरकारी कामकाज करना पड़ रहा है। इससे अनेक लोग राशन आदि सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राखी देवी ने बताया कि कस्बे में दो प्राथमिक विद्यालय हैं। दोनों के प्रधानाचार्य केंद्र के लिए स्थान नहीं होने की बात कह रहे हैं। एक विद्यालय मात्र दो कमरों में चल रहा है। जबकि, दूसरे में भी स्थान कमी है। राखी के अलावा संगीता, सुखपाली व सुनीता ने बताया कि केंद्र नहीं होने के कारण अलग-अलग स्थानों पर बैठकर राशन वितरित करने में परेशानी हो रही है।