अलीगढ़ में हुए शराब कांड में सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आबकारी आयुक्त पी गुरुप्रसाद को हटा दिया गया है। उनके स्थान पर प्रतिनियुक्ति से लौटे रिग्जयान सैंफिल को आबकारी आयुक्त बनाया गया है। अभी तक इस मामले में बड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने से सरकार पर सवाल उठ रहे थे।
यही नहीं, अलीगढ़ में जहरीली शराब कांड में सीओ गभाना कर्मवीर सिंह को निलंबित कर दिया है। इस मामले में सीओ खैर शिवप्रताप सिंह और सीओ सिटी थर्ड विशाल चौधरी से घटना के संबंध में तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने दी है।
एक अन्य घटानाक्रम में एसएसपी अलीगढ़ ने आठ बीट सिपाही निलंबित कर दिए हैं। उन पर आरोप है कि उनके इलाकों में शराब बिकती रही और मौत हो गई और उन्हें भनक तक नहीं लगी। वहीं, उन्होंने बीट सिपाहियों को जरूरी निर्देश भी दिए हैं। इधर, इंस्पेक्टर टप्पल पीके मान के निलंबन के बाद टप्पल में समय सिंह को नया इंस्पेक्टर तैनात किया है।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि मानवाधिकार सेल के प्रभारी समय सिंह को टप्पल में तैनाती दी गई है। वहीं बीट सिपाहियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है। उन्हें जरूरी हिदायतें दी गई हैं। इसी क्रम में आठ को निलंबित किया गया है।
जानकारी के अनुसार अलीगढ़ में सरकारी ठेके से जहरीली शराब बिकने की घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया। अलीगढ़ शराब कांड में यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले संयुक्त आबकारी आयुक्त स्तर तक के अधिकारियों पर ही कार्रवाई हुई थी।
पिछली घटनाएं भी बनी आबकारी आयुक्त के हटने की वजह
प्रदेश में जहरीली शराब की वजह से केवल इस वर्ष एक दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसमें प्रतापगढ़ और प्रयागराज में आधा दर्जन घटनाएं, फतेहपुर, चित्रकूट, अम्बेडकरनगर, बदायूं, आजमगढ़ और बुलंदशहर में हुई घटनाएं शामिल हैं।
इन सभी मामलों में शासन और प्रशासन द्वारा जिला स्तर पर कार्रवाई करके खाना पूरी कर दी जा रही थी। पहले इन घटनाओं को पंचायत चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद भी घटनाओं का सिलसिला जारी था। लेकिन इस बार अलीगढ़ में सरकारी ठेके से लेकर पी गई शराब से दर्जनों लोगों की जान चली गई। इस घटना ने तब और तूल पकड़ लिया जब सता पक्ष के सांसद और विधायक ने ही अधिकारियों पर सवाल उठाने शुरु कर दिए। जिसके बाद सरकार पर कार्रवाई का दबाव काफी बढ़ गया था। माना जा रहा है कि इसी दबाव के कारण ही आबकारी आयुक्त को उनके पद से हटाया गया है।