जेवर (मनोज कुमार शर्मा)। नोएडा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए दूसरे चरण की अधिसूचित जमीन पर हुए बैनामों की जांच प्रक्रिया उपजिलाधिकारी जेवर ने शुरू कर दी है। उपजिलाधिकारी ने जेवर रजिस्ट्री कार्यालय से 1 अक्तूबर के बाद हुए बैनामों की सूची मांगी थी। जिसे रजिस्ट्री कार्यालय ने उपलब्ध करा दिया है। बैनामों की संख्या खासी ज्यादा है। फिलहाल एयरपोर्ट के लिए अधिसूचित गाटा संख्याओं में हुए बैनामों की छंटनी का कार्य जारी है।
अमर उजाला ने 16 फरवरी के अंक में ‘प्रशासन बेखबर प्रापर्टी डीलर एयरपोर्ट की जमीन बेचने में मस्त’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद प्रशासन ने मामले में उपजिलाधिकारी जेवर को जांच के आदेश दिए थे। उपजिलाधिकारी जेवर रजनीकांत मिश्र ने बताया कि 1 अक्तूबर से 16 फरवरी तक जेवर रजिस्ट्री कार्यालय पर हुए बैनामों की सूचना मांगी गई थी। सूचना लगभग 800 सेे अधिक पेजों में मिली है जिसमें से एयरपोर्ट के लिए अधिसूचित 1987 गाटा संख्याओं में हुए बैनामों की छंटनी की जा रही है।
जांच में एयरपोर्ट की अधिसूचित 6 गांव की 1185 हेक्टेयर जमीन पर कुल कितने बैनामें हुए है और इन बैनामों को लेने वाले लोगो की संख्या क्या है। साथ ही इन बैनामों में जमीन लेने वाले लोगो ने कितने रकबे का बैनामा लिया है इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जिससे साफ हो सके कि बैनामा लेने वालों ने निवेश के लिए बैनामों को लिया है या फिर एयरपोर्ट की योजना में केवल अनुचित लाभ लेने के उददेश्य से बैनामें किए थे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच जल्द पूरी कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी। शिकायत के बाद सितंबर में बैनामों पर रोक के लिए रजिस्ट्री ऑफिस को दी गई थी सूचना एयरपोर्ट के लिए अधिसूचित 1185 हेक्टेयर जमीन पर अधिग्रहण के दौरान जमीन मालिक को मिलने वाले 5,50,000 लाख रुपये का अनुचित लाभ उठाने के लिए बड़ी संख्या में बैनामें होने की सूचना मिली थी जिसके बाद तहसील से गाटा संख्या के साथ रजिस्ट्री ऑफिस के लिए सूचना भेजी गई थी।
प्रॉपर्टी डीलरों के पास पहुंची अधिसूचित गाटा संख्याओं की लिस्ट
एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए जेवर के 6 गांव के किसानों से 1185 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। अधिग्रहण लिए चिह्नित गाटा संख्याओं की लिस्ट केवल यमुना विकास प्राधिकरण, तहसील और सर्वे टीम के पास थी। लेकिन यह लिस्ट प्रॉपर्टी डीलरों के पास पहुंच कई। जिससे इन गाटा संख्याओं में बड़ी संख्या में बैनामे शुरू हो गए। स्थानीय निवासियों के मुताबिक मामले की जांच की गई तो तहसील व प्राधिकरण के भी कुछ कर्मचारियों की लापरवाही भी सामने आ सकती है। संवाद