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नोएडा: हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुपरटेक ने दिए थे निवेशकों को तीन विकल्प, कई करते रहे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार

Tue, 31 Aug 2021 11:15 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

सेक्टर-93ए के सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 40 मंजिला ट्वीन टावर गिराने के आदेश दिए हैं। इस मामले में प्राधिकरण के एसीईओ की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर विभागीय जांच होगी।
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सुपरटेक ट्वीन टावर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेक्टर-93ए के सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 40 मंजिला ट्वीन टावर गिराने के आदेश दिए हैं। इस मामले में प्राधिकरण के एसीईओ की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर विभागीय जांच होगी। इसके बाद बिल्डर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुपरटेक ने निवेशकों को तीन विकल्प दिए थे। अपेक्स व सियान टावर के निवेशकों के सामने सुपरटेक ने तीन विकल्प में से कोई एक चुनने के लिए 30 अप्रैल 20 तक का समय दिया था।

निवेशकों को दिए गए विकल्प
1. निवेशक 14 प्रतिशत ब्याज के साथ अपनी धनराशि वापस ले सकते हैं। 
2. निवेशक सुपरटेक के किसी अन्य प्रोजेक्ट में फ्लैट ले सकते हैं। दोनों फ्लैटों के बीच कीमत का अंतर सुपरटेक की तरफ से निवेशक को वापस कर दिया जाएगा। निवेशक किस प्रोजेक्ट में जाना चाहता है, यह उसे तय करना होगा। अगर उसकी मन-पसंद प्रोजेक्ट में फ्लैट खाली होगा तो उसे तत्काल शिफ्ट कर दिया जाएगा।
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3. निवेशक चाहें तो वह सुपरटेक के साथ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

250 निवेशक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कर रहे थे इंतजार  
दिए गए विकल्प में से 250 निवेशकों ने 14 प्रतिशत ब्याज सहित अपना पैसा वापस ले लिया था। वहीं करीब 150 निवेशक दूसरे प्रोजेक्ट में शिफ्ट हो गए थे। करीब 250 निवेशक ऐसे थे, जिन्होंने कोई विकल्प नहीं चुना था और वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे। 

तीन माह में कराया जाएगा ध्वस्त
वहीं, प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इसमें कोर्ट की ओर से एक-एक बिंदुओं पर उठाए गए सवाल और बताई गई कमियों की जांच होगी। टावर-16 और 17 को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) या विशेषज्ञ संस्था से तीन माह में ध्वस्त करा दिया जाएगा। मामले में पहले की सुनवाई के समय समस्त तथ्यों से अधिकारियों को अवगत नहीं कराने से नियोजन विभाग के दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
 
पुनर्विचार याचिका दायर करेगा सुपरटेक
इस मामले में सुपरटेक अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालेगा। सुपरटेक के एमडी मोहित अरोड़ा ने बताया कि कंपनी की ओर से कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। सीईओ रितु माहेश्वरी का कहना है कि अगर सीबीआरआई यह काम नहीं कर पाती है तो किसी विशेषज्ञ संस्था से तीन माह में टावरों का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। इस मामले में कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को किसी भी संस्था को चयनित करने की छूट दे रखी है।

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