नोएडा (योगेश शर्मा)। ‘करीब एक दशक पहले संजय अपने माता-पिता और तीन भाइयों को लेकर नोएडा आया था। सेक्टर-93 स्थित गेझा गांव में कोयले का कारोबार शुरू कर पूरे इलाके में कोयले वाले के नाम से उसने अपनी पहचान बना ली थी। कमाई बढ़ी तो करीब चार माह पहले नई वैगनआर कार उसने खरीदी थी। इसी कार से सप्ताहभर पहले छोटे भाई राजेश की शादी के लिए नोएडा से पूरा परिवार गांव सुंदरपुर गया था, लेकिन क्या मालूम था कि भाई की शादी की खुशियां मातम में बदल जाएंगी...।’ इस दर्द को बयां कर रामबाबू के आंसू थम नहीं रहे थे।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे में जान गंवाने वाले लल्लूराम का बेटे रामबाबू ही हैं जो सही-सलामत नोएडा पहुंचे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि भाई की शादी के बाद शुक्रवार को वह रोडवेज बस से हरदोई से नोएडा के लिए निकल गए थे, जबकि संजय पत्नी निशा, दो बच्चों, नवविवाहित राजेश और नंदिनी, छोटे भाई श्रीगोपाल, पिता लल्लू और माता छुटकी के साथ कार से आ रहे थे। रामबाबू शनिवार तड़के तीन बजे ही नोएडा आकर आराम करने लगे थे कि फोन पर यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे की सूचना मिली। यह सुनकर वापस मथुरा की ओर चल पड़े। रामबाबू ने बताया कि संजय ने 11 जनवरी को ही नई कार खरीदी थी। इसमें पूरा का पूरा परिवार उजड़ गया।
बहन से मिलने का सपना रह गया अधूरा
नंदिनी बड़ी बहन रोशनी के साथ गेझा गांव में ही किराये के घर में रहती थी। राजेश और नंदिनी की शादी की बात पहले से ही चल रही थी। रोशनी बहन की शादी से लौटकर शनिवार तड़के ही नोएडा आई थी। जब हादसे की जानकारी मिली तो घर में मातम छा गया। रोशनी ने बताया कि नंदिनी और राजेश ने विवाह के बंधन में बंधने के बाद नोएडा आकर नई दुनिया बसाने के सपने संजोए थे, लेकिन सपना अधूरा रह गया। मालूम नहीं था कि जिस बहन को विदा कर उससे नोएडा में मिलने का उत्साह था वह अब कभी नहीं मिलेगी।
दुकान और घर पर पसरा सन्नाटा
गेझा मार्केट में संजय की कोयले की दुकान है, जिस पर ज्यादातर पिता लल्लूराम बैठते थे। संजय पार्श्वनाथ सोसाइटी में बतौर कार चालक नौकरी भी कर रहा था। यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे की खबर तेजी से फैली और कोयले वाले का पता पूछने पर हर कोई रुआंसे मन से बस यही कर रहा था कि अब वह दुनिया में नहीं रहे। दुकान बंद थी, जबकि सामने वाली गली में संजय के किराये के घर में सन्नाटा पसरा था।