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मु स्लिम की निर्णायक भूमिका---

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हेडिंग: निर्णायक भूमिका निभाएंगे 2.50 लाख मुस्लिम वोटर
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सबहेड: गौतमबुद्धनगर में जाति के आधार पर उतारे गए हैं प्रत्याशी, किसी भी पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी पर दांव नहीं खेला
एसएस अवस्थी
नोएडा। राष्ट्रीय राजधानी से सटे और देश-दुनिया में औद्योगिक क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट पर कौन-कौन चुनाव लड़ेगा, यह फाइनल हो चुका है। जातियों के आधार पर बंटे इस लोकसभा क्षेत्र में किसी पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा है, जबकि हकीकत यह है कि क्षेत्र के करीब 2.50 लाख मुसलमान वोटर यहां निर्णायक भूमिका में हैं।
नोएडा, दादरी, जेवर, खुर्जा व सिकंदराबाद को मिलाकर कुल पांच विधानसभाएं लोक सभा क्षेत्र में हैं। अगर जातिगत वोटरों की बात करें तो गुर्जर, ठाकुर, मुस्लिम व एससी वोटरों का दबदबा है। हालांकि प्रशासन की तरफ से कोई जातिगत आंकड़ा तो नहीं जारी किया गया, लेकिन कुछ सर्वे यही बताते हैं कि गुर्जर, ठाकुर, एससी व मुस्लिम वोटरों की संख्या ढाई-तीन लाख के आसपास है। दादरी क्षेत्र को गुर्जरों की राजधानी कहा जाता है, इसलिए यह गुर्जर बाहुल्य सीट मानी जाती रही है। इसी तरह पूरे जेवर क्षेत्र में सबसे अधिक ठाकुर वोट माने जाते हैं। एससी वोटर भी पूरे लोकसभा क्षेत्र में हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, वैश्य, बघेल-पाल समाज, पंजाबी, धीमर व वाल्मीकि भी सभी क्षेत्र में मिल जाते हैं।
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जातियों पर निर्भर प्रत्याशी
बसपा-सपा-रालोद गठबंधन ने गुर्जर प्रत्याशी सतवीर नागर पर दांव खेला है। पिछले चुनावों 2009 व 2014 में भी पार्टी ने गुर्जर प्रत्याशी ही उतारा था। भाजपा ने 2009, 2014 व 2019 में ब्राह्मण प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा को उतारा है। 2014 में पहली बार ब्राह्मण प्रत्याशी के रूप में डॉ. महेश को जीत मिली थी। इसी तरह कांग्रेस ने डॉ. अरविंद सिंह को टिकट दिया है। पिछले 2009 व 2014 में भी कांग्रेस ने ठाकुर प्रत्याशी को उतारा था।
मुस्लिम वोटर शोर नहीं मचाता
गौतमबुद्ध नगर से किसी भी पार्टी ने मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है। जबकि सिकंदराबाद में सबसे अधिक मुस्लिम वोटर हैं। खुर्जा, जेवर व दादरी कस्बे में भी अच्छी खासी वोटरों की संख्या है। रबूपुरा, बिलासपुर, ग्रेटर नोएडा व नोएडा क्षेत्र में भले ही इनकी संख्या बहुत अधिक न हो, लेकिन जितने भी वोटर हैं, उनका मतदान प्रतिशत सबसे अधिक होता है। चुनाव में इनकी संख्या निर्णायक मानी जाती है।
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जातिगत आधार तो है, लेकिन जब से शहरी वोटरों का संख्या बढ़ी है तो जाति का फंडा कमजोर हो गया है। कुछ वोटर तो ऐसे होते हैं जिन्हें जाति आधार से कोई लेना देना नहीं होता है और वे मुद्दों पर वोटिंग करते हैं। यही वोटर परिणाम को प्रभावित भी करते हैं।
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- डॉ. पीके पचौरी, राजनीतिक जानकार
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ज्यादातर वोटरों के बारे में माना जाता है कि वह अपनी जाति के प्रत्याशी को ही प्राथमिकता देते हैं। चूंकि यहां से किसी पार्टी ने मुस्लिम प्रत्याशी नहीं उतारा है तो मुस्लिम वोटर किसी के पक्ष में जाने के लिए चिल्लाएगा नहीं, यह चुप रहने वाला वोटर है।
- डॉ. योगेंद्र सिंह, राजनीतिक जानकार
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मोदी का मैजिक मुस्लिम ही नहीं सभी वोटरों को प्रभावित करता है। मोदी को हर जाति का वोटर वोट देता है क्योंकि मोदी का मुख्य उद्देश्य देश का विकास है।
- विनोद शर्मा, मीडिया प्रभारी भाजपा
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मुस्लिम वोटर हमेशा बसपा व सपा के साथ रहा है। इस बार चुनाव में गठबंधन है तो वोटर भ्रमित नहीं होगा। इसलिए मुस्लिम वोटर भ्रमित नहीं है।
- अनिल यादव, पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता सपा
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पार्टी सभी वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलती है। आजादी के बाद सबसे ज्यादा सत्ता कांग्रेस की ही रही है। मुस्लिम वोटर का विश्वास कांग्रेस पर है।
- कृपाराम शर्मा, वरिष्ठ नेता कांग्रेस
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