- यमुना में पूजा सामग्री प्रवाहित करने पर नहीं लग पाई रोक, एनजीटी ने अब दिल्ली और यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर के लोग हर माह यमुना में करीब 750 किलो आस्था के फूल, पूजा का सामान और पॉलिथीन बैग प्रवाहित करते हैं। यमुना समेत अन्य नदियों में श्रद्धा के नाम पर बढ़ रहे प्रदूषण को रोक पाने में नाकामी पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने यूपी सरकार और दिल्ली सरकार से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य सुधीर अग्रवाल, डॉ. सेंथिल वेल की ओर से जारी आदेश के मुताबिक पॉलिथीन बैग सहित फूल, मालाएं और दूसरी सामग्रियां नदियां में फेंकी जा रही हैं। इससे नदियां प्रदूषित होती हैं। एनजीटी इस मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। ऐसे में अब समिति की मांग पर चार सप्ताह का समय दिल्ली सरकार को दिया गया है। इस मसले पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के अलावा यूपी सरकार की एजेंसी यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी जवाब मांगा गया है। याचिका में एनजीटी में यह मुद्दा सामने आया कि लोग पॉलिथीन में भरकर पूजा सामग्री नदी में फेंक रहे हैं। एनसीआर में रोजाना यमुना नदी में करीब 25 किलो ऐसा कचरा प्रवाहित किया जाता है।
नदियों में पूजा सामग्री प्रवाहित करने पर रोक
एनजीटी और अलग-अलग हाईकोर्ट ने भी नदियों में पूजा सामग्री प्रवाहित करने पर रोक लगाई हुई है। दुर्गा पूजा और गणेश पूजा के समय मूर्तियां और अन्य सामग्री भी नदियों में प्रवाहित करने पर प्रतिबंध है। इसकी जगह स्थानीय निकायों को नदी किनारे घाटों पर पूजा सामग्री एकत्रित कराने के लिए निर्देश हैं। वहीं मूर्तियों को सीधे नदी में प्रवाहित करने की जगह उनके लिए नदी किनारे विसर्जन कुंड बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।