नोएडा। जनपद में हर माह औसतन 700 लोग क्षय रोग या ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के रोगी बन रहे हैं। गंभीर बात यह है कि हर साल करीब 10 फीसदी टीबी के मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। इसकी वजह से कुछ दिनों के बाद उनकी परेशानी खासी बढ़ जाती है। जिले में इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की मृत्यु दर सालाना दो से तीन फीसदी दर्ज की गई है। टीबी के संक्रमण की शुरुआत में ही मरीज की पहचान होने से उसका उपचार आसान हो जाता है। इलाज शुरू नहीं होने तक टीबी का मरीज कई लोगों को संक्रमित कर देता है, लेकिन एक माह के उपचार के बाद अन्य लोगों को टीबी फैलने का खतरा खत्म हो जाता है।
इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. शिरीष जैन ने बताया कि साल 2019 से लेकर अब तक जिले में 26,291 टीबी के मरीजों की पहचान हो चुकी है। रोगी की पहचान होने पर परिवार वालों की भी टीबी की जांच की जाती है। जरूरी होने पर उनका भी उपचार किया जाता है। सामान्य टीबी का उपचार छह माह चलता है। यदि बीच में इलाज छोड़ दिया जाता है तो मल्टीड्रग रजिस्टेंट टीबी का खतरा पैदा हो जाता है, फिर इसका उपचार लंबा चलता है। इसलिए उपचार अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि टीबी एक घातक संक्रामक रोग है जो कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से फैलता है। यह संक्रमण ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी का जोखिम मधुमेह पीड़ित, घर के बाहर रहने वाले किशोर जो समय पर खाना नहीं खा पाते, स्तनपान कराने वाली महिलाएं जो समुचित पौष्टिक आहार नहीं ले पाती हैं और धूम्रपान करने वालों में ज्यादा होता है।
टीबी रोगियों को कोरोना का खतरा अधिक
टीबी के मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इसलिए कोरोना संक्रमण का खतरा अधिक होता है। ऐसे में मरीजों को सतर्कता बरतना जरूरी है। विशेषकर उन मरीजों को जो पहले से फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं। लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। कोरोना की तीसरी लहर में जान गंवाने वाले कई मरीज टीबी संक्रमित भी थे।
जांच और इलाज में देरी से बढ़ रहे रोगी
फेलिक्स अस्पताल के चेस्ट रोग व टीबी विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र प्रियदर्शी ने बताया कि टीबी रोगी को लंबे समय तक खांसी रहती हैं। वहीं लोग इसे सामान्य खांसी समझकर बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खा रहे हैं। इससे कुछ समय के लिए मरीज ठीक हो जाता है, लेकिन बाद में यह खतरनाक साबित होने लगता हैं। बिना बीमारी जाने दवा लेने से बीमारी ठीक होने की बजाय बढ़ जाती है।
जीवनशैली सुधारें और तंबाकू छोड़ें
फोर्टिस अस्पताल नोएडा के निदेशक (पल्मोनोलॉजी) डॉ. मृणाल सरकार ने बताया कि सेहतमंद और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर टीबी रोग से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन दिनों सामने आ रहे टीबी के अधिकांश मामलों में गलत जीवनशैली और तंबाकू का सेवन जैसी आदतें प्रमुख कारण हैं। लक्षण मिलने पर बिना देरी किए जांच कराएं और रोग की पुष्टि होने पर इलाज शुरू कराएं। ऐसा करने से परिवार के अन्य लोगों को संक्रमण के जोखिम से बचाया जा सकता है।
लाइलाज नहीं टीबी का रोग
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. शिरीष जैन ने बताया कि पूरा इलाज कराने और सही पोषण से टीबी रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है। टीबी लाइलाज नहीं है, इसे छुपाना नहीं चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को टीबी रोग के लक्षण हैं तो उसे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच और उपचार निशुल्क है।
टीबी के लक्षण
तीन सप्ताह से अधिक खांसी, अत्यधिक पसीना आना, बलगम के साथ खून आना, शरीर में सुस्ती और थकावट, वजन में कमी, लंबे समय तक छाती में दर्द, हल्का बुखार, भूख नहीं लगना, मांसपेशियों में दर्द, सांस फूलना आदि।
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गौतमबुद्ध नगर में हर वर्ष मिले टीबी मरीजों की संख्या
वर्ष मरीज
2019 9,907
2020 7,024
2021 8,274
2022 1086
नोट: स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़े। वर्ष 2022 में 15 मार्च तक के आंकड़े