नूंह। जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के करीब 70 फीसदी पद खाली हैं। इसका सीधा असर विभाग के कार्यों पर पड़ ही रहा है। साथ में आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे भी विभाग की ओर से दी जा रही सुविधाओं से वंचित हैं। अधिकारियों की देखरेख के बिना केंद्रों में बच्चों की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
केंद्र सरकार ने नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पोषण के क्षेत्र में नूंह जिले को देश में पिछड़ा माना है। ऐसे में नौनिहालों के पोषण की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। पिछले एक महीने से गोदामों पड़ा राशन खराब हो रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी नहीं होने से यह कार्य अधूरा पड़ा है। जिले में चाइल्ड डेवलपमेंट कार्यक्रम अधिकारी (सीडीपीओ) से लेकर सुपरवाइजर और सहायकों तक के पद खाली होने से जिले के केंद्रों में नौनिहालों को सुविधा देने के नाम पर मात्र खानापूर्ति हो रही है। ज्यादातर कार्यालयों में तो हालात ऐसे हैं कि एक-एक कर्मचारी पर चार-चार लोगों का कार्यभार है। कार्यालयों में कम स्टाफ होने के कारण विभाग केंद्रों की दशा सुधारने में खुद को असमर्थ पा रहा है।
सीडीपीओ के सभी पद हैं खाली
नूंह में सीडीपीओ के अलग-अलग स्थानों पर सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सभी पद खाली पड़े हैं। ऐसे ही कई सहायकों के पद खाली हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में दो महीने से क्लर्क भी नहीं है। कई स्टोर कीपर और चपरासी तक के पद खाली पड़े हैं।
26 पदों पर सुपरवाइजर नहीं
आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य कार्यों की देखरेख करने के लिए 26 सुपरवाइजरों के पद भी खाली पड़े हैं। जिले में सुपरवाइजर के 45 पद स्वीकृत हैं। इनमें से मात्र 19 सुपरवाइजर ही कार्य कर रही है। इसके अलावा आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्परों के भी 100 से अधिक पद खाली हैं।
नहीं निकाली जा रही भर्ती
अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली होने का प्रमुख कारण नए पदों पर भर्ती या पदोन्नति का नहीं होना है। विभाग में पिछले लंबे समय से पदों को भरने के लिए भर्तियां नहीं निकाली जा रही हैं और न ही पुराने कर्मचारियों को पदोन्नति किया जा रहा है। इस कारण अधिकारियों के कार्यालयों में कोर्ट केस, सीएम विंडों और आरटीआई समेत कई प्रकार के कार्य अधर में हैं।
1150 केंद्रों में करीब दो लाख बच्चे सुविधाओं से वंचित
कमी के कारण केंद्र संचालकों का संपर्क अधिकारियों के साथ कम रहता है। जिले में कुल 1150 केंद्र हैं, जिनमें दो लाख से ज्यादा बच्चे परियोजना के तहत सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित हैं। कार्यभार ज्यादा होने के कारण मौजूद अधिकारी भी समय पर केंद्रों का जायजा नहीं ले पा रहे हैं।
किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं 90 फीसदी भवन
विभाग के पास अपना भवन भी नहीं है। वह भी एक जर्जर इमारत में चल रहा है, जिससे यहां पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं जिले के अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की जिला प्रधान रीटा धारीवाल ने कहा कि केंद्रों को चलाने के लिए सरकार जिस प्रकार से घोषणाएं कर रही है, उसके अनुसार कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। करीब 90 फीसदी केंद्र किराये की इमारतों में चल रहे हैं।
आदेश के बावजूद नहीं संभाला चार्ज
जिला कार्यक्रम अधिकारी का पद कई महीने से खाली पड़ा है। सरकार ने सीमा प्रसाद को नूंह जिला कार्यक्रम अधिकारी नियुक्त किया था, लेकिन इन्होंने ज्वाइन नहीं किया।
जानकारी लेकर करेंगे समाधान
उपायुक्त कैप्टन शक्ति सिंह ने कहा कि इस बारे में जानकारी ली जाएगी। इस समस्या का स्थायी समाधान कराया जाएगा। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।