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Noida News: रामपुर, ननखड़ी और निरमंड की 45 सड़कें अभी भी बंद

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रामपुर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सडक़ें बाधित होने से पैदल रास्तों से निकाली जा रही सेब की पेट
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हजारों ग्रामीण, स्कूली बच्चे और मरीजों की दुश्वारियां बरकरार
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समय पर सड़कें न खुलने से बागवानों की सेब की फसल को पहुंची क्षति
रामपुर, ननखड़ी में 31 और निरमंड उपमंडल की 14 सड़कें बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/ननखड़ी/निरमंड। जून से शुरू हुई बरसात अब थमने लगी है, लेकिन ऊपरी हिमाचल के हजारों ग्रामीणों की दुश्वारियां अभी भी बरकरार हैं। आपदा के कारण बाधित हुई सड़कों के कारण हजारों ग्रामीणों को यातायात के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। आपदा के एक महीने बाद स्थिति और दयनीय बन गई है। रामपुर, ननखड़ी और निरमंड की 45 सड़कें अभी भी बंद है। इन सड़कों के बंद होने के कारण सेब बागवानों को इस वर्ष लाखों का नुकसान झेलना पड़ा है। समय पर सेब मंडी न पहुंचने के कारण बागवानों की वर्षभर की मेहनत पर पानी फिर गया है। अब सेब सीजन अंतिम चरण में है और छोटे वाहन खतरों भरी सड़कों पर फसल ढो रहे हैं। इस वर्ष भारी बारिश से आई आपदा ने हर क्षेत्र में नुकसान पहुंचाया है। खासकर, जुलाई के अंत और सितंबर की शुरुआत में रामपुर, ननखड़ी और निरमंड क्षेत्र की सड़कों को काफी क्षति पहुंची है। जगह-जगह भूस्खलन की चपेट में सड़कें आ गई है, जबकि कई स्थानों पर डंगे ढह गए हैं और पहाड़ी से भारी भूस्खलन के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। रामपुर उपमंडल में अभी भी अधिकतर ग्रामीण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाई हैं। कुछ सड़कें केवल छोटे वाहनों के लिए ही खुल पाई हैं। इन सड़कों पर भी सफर करना जानलेवा बना हुआ है। ननखड़ी और रामपुर की 31 सड़कें अभी भी यातायात के लिए ठप पड़ी हैं। ऐसे में बागवानों समेत ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, नौकरी पेशे से जुड़े लोगों को आवाजाही करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। ग्रामीण इलाकों से मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यही हाल रामपुर के साथ सटे कुल्लू जिले के निरमंड उपमंडल का भी है। यहां ऊंचाई वाले इलाकों में अभी भी सेब की हजारों पेटियों को सेब भेजा जाना बाकी है। क्षेत्र की सड़कों को बरसात से काफी क्षति पहुंची है और ग्रामीण रूट एक महीने से ठप पड़े हैं। सैकड़ों बागवानों की सेब की फसल खराब हो गई है। सड़क बाधिक होने से क्षेत्र की चायल पंचायत में सेब की करीब 40 हजार पेटियां फंसीं थीं, जो अब सड़क खुलने के बाद मंडियों को भेजा जा रहा है। यहां सड़क केवल छोटे वाहनों के लिए ही खुली है। छोटे वाहन भी जोखिम के साथ सेब को मंडी पहुंचा रहे हैं। अब क्षेत्र में सेब की करीब 30 हजार पेटियां मंडियों में भेजी जा रही हैं। उपमंडल की 14 सड़कें अभी भी यातायात के लिए ठप पड़ी हैं।
रामपुर उपमंडल की बंद सड़कें
बरसान और भूस्खलन से रामपुर और ननखड़ी क्षेत्र की मशनू, फूंजा-शाह, शमकोर-जघोरी, गानवी सड़क पेरीनाला में, शलूण-ब्यूंथल, ननखड़ी-खमाडी, नागाधार-देलठ, चड़ी-थाच और नालाबन-बेइनाल सड़क को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा धोना-गरटोला, खोलीघाट-शलाग, पूनन-गड़ासू, खमाडी-चमाडा, चड़ी-ढारन, खल्टूधार-छलाण, ज्वालडा-कलेडा, गाहन-खड़ाहण, कोफरधार-छछीधार, खड़ाहन-लाहरू, खोआ-बनोगा, झिझणू-शरोग कैंची, खड़ाहन-कोटाधार, शोली-धरागला, रामपुर-पांडाधार, तकलेच-देवठी, तकलेच-काशापाट, तकलेच-बाहली, उरमण-मुनिश, बरकल-थड़ा और दारनघाटी-बेवला-कूहल सड़क अभी भी यातायात के लिए बहाल नहीं हो पाई है।
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निरमंड में एक माह से बंद सड़कें
निरमंड उपमंडल की कंडा-कतमोर, शरशाह-मरगी, दुराह-उरटू, बागीपुल-जाओं, टिकरी कैंची-अरसू सड़क बहाल नहीं हो पाई है। इसके अलावा अरसू-कुंडाकोड, दशोग, निरमंड-बांदल, निरमंड-केदस, अरसू-डमैहड़ी, पांकवा और रैची से खणी सड़क अभी भी बंद पड़ी है।
25 मशीनें की हैं तैनात
रामपुर के एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने बताया कि रामपुर और ननखड़ी की बाधित सड़कों को बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों को बहाल करने के लिए 25 मशीनें तैनात की हैं। विभाग को जल्द सड़कों को बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
निरमंड में 12 मशीनें तैनात
लोक निर्माण विभाग निरमंड के सहायक अभियंता राकेश नेगी ने बताया कि उपमंडल की बाधित सड़कों को बहाल करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। 12 मशीनें और कई मजदूर सड़कों को बहाल कर रहे हैं।
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गानवी और सेरीपुल बने मुसीबत, बहाली में लगेंगे कई माह
15/20 क्षेत्र के गानवी में 14 अगस्त को आई बाढ़ से सड़क का नामोनिशान ही मिट गया है। बाढ़ की चपेट में आने से खड्ड पर बना पुल बह गया है। इस कारण क्षेत्र की छह पंचायतों का उपमंडल से संपर्क कटा हुआ है। यही हाल सेरीपुल का भी है, जहां बीते कई वर्षों से समस्या बनी हुई है। सेरीपुल में लगातार भूमि धंसने के कारण सड़क हर वर्ष बाधित होती है। इस कारण क्षेत्र की चार पंचायतों के हजारों ग्रामीण परेशानी झेलते आ रहे हैं। बरसात में मुख्य सड़क के बंद होने से बागवानों का सेब मंडी पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इस वर्ष भी बागवानों ने वाया बाहलीधार संपर्क सड़क से अपनी फसल मंडी पहुंचाई। इस कारण उन्हें आर्थिक मार के साथ अतिरिक्त सफर भी करना पड़ा। इन दोनों स्थानों में अभी एनएच की बहाली में कई महीने का समय लगने वाला है।

रामपुर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सडक़ें बाधित होने से पैदल रास्तों से निकाली जा रही सेब की पेट

रामपुर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सडक़ें बाधित होने से पैदल रास्तों से निकाली जा रही सेब की पेट

रामपुर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सडक़ें बाधित होने से पैदल रास्तों से निकाली जा रही सेब की पेट

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