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जिले की 33.3 फीसदी आबादी पर अब भी संक्रमण का खतरा

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नोएडा। जिले में 6 वर्ष से अधिक उम्र की 33.3 फीसदी आबादी पर कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से देश के 70 जिलों में कराए गए सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी हो गई है। गौतमबुद्ध नगर के 400 लोगों को इस सर्वे में शामिल किया गया। इनमें से 67.7 फीसदी में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी पाई गई है। यानी जिले की करीब 5.5 लाख आबादी अब भी कोरोना संक्रमण के खतरे में है।
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आईसीएमआर के निर्देश पर राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर) ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से 28 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गौतमबुद्ध नगर, सहारनपुर, अमरोहा में सीरो सर्वे की शुरुआत की थी। एनआईसीपीआर की निदेशक सिंह के नेतृत्व में हुए सर्वे के दौरान इन जिलों के कुल 1200 लोगों को शामिल किया गया। प्रत्येक जिले के 400 लोगों पर सर्वे किया गया।
हर जिले में 100 स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हुए। पहली बार 6 से 17 वर्ष तक की आयु के बच्चों को सर्वे में शामिल किया गया। उम्र, लिंग, व्यवसाय, क्षेत्र, संपर्क इतिहास, आरटीपीसीआर जांच और टीकाकरण के पहलुओं को ध्यान में रख सर्वे कर एंटीबॉडी के प्रसार का अनुमान लगाया गया। चौथे चरण के सीरो सर्वे में प्रत्येक जिले से 10 गांव-वार्ड शामिल किए गए। हर गांव व वार्ड में 40 लोगों को सर्वे का हिस्सा बनाया गया। जिलेभर से कुल 400 लोगों पर सर्वे किया गया। इनमें कोरोना के दौरान फ्रंट लाइन वर्क के रूप में कार्य करने वाले 100 स्वास्थ्य कर्मी भी हैं।
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करीब 11 लाख लोगों में बनी एंटीबॉडी
साल 2021 में जिले की अनुमानित आबादी करीब 19 लाख आंकी गई है। इनमें से 0 से 6 वर्ष तक की आयु की आबादी करीब 2.46 लाख है। ऐसे में शेष बची 16.62 लाख आबादी में से करीब 11 लाख में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। जबकि, करीब 5.5 लाख कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के घेरे में नहीं आ सके हैं।
तेज रफ्तार से बढ़ा संक्रमण का दायरा
जिला जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार ने बताया कि सीरो सर्वे में जिले में 0.73 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिलीं थी। दूसरे सर्वे में 6.6, तीसरे में 20.40 और अब चौथे सर्वे में यह आंकड़ा 67.7 फीसदी पहुंच गया है। यानी, दूसरी लहर में कोरोना संक्रमण का दायरा काफी तेज रफ्तार से बढ़ा है। स्वास्थ्यकर्मियों की बात की जाए तो 85 फीसदी में एंटीबॉडी मिली है। 15 फीसदी अब भी कोरोना संक्रमण के साये में हैं।
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