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जेएनयू छात्रसंघ सीसीएस पर शिक्षकों का देगा साथ

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सीसीएस पर शिक्षकों का साथ देगा जेएनयू छात्रसंघ
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कहा-बोलने का अधिकार खत्म कर रही है केंद्र सरकार

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस) नियमावली के विरोध में आ गया है। छात्रसंघ का कहना है कि केंद्र सरकार शिक्षकों व कर्मियों के बोलने का अधिकार खत्म कर रही है। छात्रसंघ देशभर के शिक्षकों और कर्मियों का साथ देगा। छात्रों ने सरकार से सीसीएस वापस लेने की मांग भी रखी है।
छात्रसंघ अध्यक्ष एन साईं बालाजी के मुताबिक, सीसीएस के माध्यम से सरकार अब उच्च शिक्षण संस्थानों में बोलने की आजादी के अधिकार को खत्म कर रही है। सरकार लोकसभा चुनाव से पहले ही सबको चुप करवाना चाहती है, ताकि कोई भी उसका विरोध न कर सके।
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छात्रसंघ का कहना है कि सरकार एक तरफ विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने की बात करती है, जबकि सीसीएस के नाम पर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, क्योंकि सीसीएस में सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने और सरकार की किसी भी नीति का विरोध करने पर कार्रवाई का अधिकार होगा। इस नियम के तहत सरकार किसी कर्मी को नौकरी से भी निकाल सकती है।
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गौरतलब है कि यूजीसी ने 1 मई को केंद्रीय विश्वविद्यालयों और सरकार से सहायता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों को सीसीएस लागू करने को कहा था। सीसीएस उन सभी संस्थानों पर लागू होगा, जिनके पास अपनी नियमावली नहीं होगी।






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