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ग्रेनो प्राधिकरण में डेढ़ साल में पांच सीईओ बदले

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हेडिंग: ग्रेनो प्राधिकरण में डेढ़ साल में पांच सीईओ बदले
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अब नरेंद्र भूषण की छठे सीईओ के रूप में तैनाती
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। आर्थिक संकट से जूझ रहे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ पद पर डेढ़ साल में छह तैनाती हो चुकी हैं। सीईओ के पद पर स्थायी तैनाती न होने का असर विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। मंगलवार को नरेंद्र भूषण छठे सीईओ बनाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में भाजपा ने मार्च में आए चुनावी नतीजों के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनाई। इसके बाद तबादलों का दौर शुरू हुआ। 2015 से सीईओ रहे दीपक अग्रवाल का अप्रैल 2017 में स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद अमित मोहन प्रसाद की तैनाती की गई। 13 अप्रैल 2017 से 22 मई 2017 तक वे सीईओ रहे। इसके बाद देबाशीष पंडा आए जो 23 मई 2017 से 23 मार्च 2018 तक सीईओ रहे। इसके बाद वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। उनकी जगह आलोक टंडन की तैनाती हुई। आलोक 23 मार्च से 23 जून 2018 तक सीईओ रहे। उनके बाद पार्थसारथी सेन शर्मा भी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए। मंगलवार को नरेंद्र भूषण की बतौर सीईओ तैनाती हुई है। वे केंद्र में प्रतिनियुक्ति से यहां आ रहे हैं। एक-दो दिन में उनके ज्वाइन करने की उम्मीद है।
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स्थायी तैनाती न होने से अटक रहे किसानों के मसले
किसान नेता मनवीर भाटी का कहना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में सीईओ की स्थायी तैनाती न होने से किसानों के मसले नहीं निपट पा रहे। नए सीईओ जब तक सिस्टम को समझते हैं, तब तक उनका तबादला हो जाता है। आर्थिक स्थिति पहले से ही खराब है।
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