रक्त प्रवाह थमने जैसा है गंगा का प्रवाह रुकना : राजेंद्र सिंह
- बैराजों को बताया गंगा की बीमारी का बड़ा कारण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जिस तरह इंसान के दिल में खून का प्रवाह बाधित होने से दौरा पड़ता है ठीक उसी तरह गंगा की धारा रूपी दिल को बैराजों ने बाधित कर रखा है। दुखद यह है कि गलत इलाज से गंगा की धारा दिन-ब-दिन मैली होती जा रही है। यह बात जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेंद्र सिंह ने गंगा की मौजूदा हालत पर अमर उजाला से कहीं।
उन्होंने कहा कि जिन कामों को गंगा बेसिन प्राधिकरण ने दस वर्ष पूर्व रोक दिया था उन्हें फिर से परियोजनाओं के नाम पर टुकड़ों में बांटकर शुरू किया है। उन्होंने बताया कि संबंधित समिति में जैसे ही तय हुआ कि गंगा की न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह 30 फीसदी के आस-पास होनी चाहिए तो उन्होंने समिति से खुद को अलग कर लिया।
तकनीकी से नहीं साफ होगी गंगा
राजेंद्र सिंह ने कहा कि गंगा को सिर्फ तकनीकी के बूते साफ नहीं किया जा सकता। बल्कि सीवेज शोधन परियोजनाएं और गंगा घाटों को बेहतर बनाने जैसे काम भी करने होंगे। यह दुखद है कि प्रोफेसर जीडी अग्रवाल यानी स्वामी सानंद जैसे व्यक्ति गंगा की सफाई के लिए 28 दिनों से भूखे हैं।
क्षीण हो रही गंगा में बायोफॉज्म की शक्ति
उन्होंने बताया कि यह बात वैज्ञानिक स्तर पर जांची और परखी गई है कि गंगाजल में कई बीमारियों को ठीक करने और प्रदूषण को लीलने की शक्ति है। मिसाल के तौर पर उन्होंने कानपुर से 20 किलोमीटर दूर बिठूर से लिए गए गंगाजल के बारे में बताया कि यहां का गंगाजल कॉलिफोर्म को नष्ट करने की विलक्षण शक्ति रखता है। यह गंगा जल में मौजूद सूक्ष्म कणों (बॉयोफाज्म) के कारण होता है। गंगा की यह शक्ति भी क्षीण हो रही है।