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Noida News: बीमा पॉलिसी के नाम पर 1000 लोगों को ठगा, गिरफ्तार

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मैजिक कॉल एप की मदद से लड़की की आवाज में फोन कर फंसाता था
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19260 लोगों का डाटा 10वीं पास आरोपी से बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा।
बिसरख कोतवाली पुलिस ने जीवन बीमा के नाम पर 1000 लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के आरोप में साइबर कैफे संचालक को गिरफ्तार किया हैं। 10वीं पास आरोपी एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का फर्जी कर्मचारी बनकर लड़की की आवाज में लोगों से बात करता था और पॉलिसी के नवीनीकरण व बंद कराने के नाम पर ठगता था। बदले में फर्जी पॉलिसी प्रमाणपत्र भी जारी करता था। आरोपी के पास से 19,260 पॉलिसी का डाटा बरामद हुआ हैं।


डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि पुलिस को लगातार फर्जी बीमा करने की शिकायत मिल रही थी। पुलिस ने जांच कर गन्नौर, सोनीपत निवासी अमित को गिरफ्तार कर लिया। अमित ग्रेनो वेस्ट की एपीएस गोल्ड बिल्डिंग की एक दुकान में दीप साइबर कैफे व स्टेशनरी का संचालन कर रहा था। आरोपी साइबर कैफे की आड़ में लोगों की पॉलिसी का फर्जी नवीनीकरण व बंद करने का काम कर रहा था। उसने एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के 19260 बीमाधारकों का डाटा एकत्रित किया हुआ था। आरोपी मैजिक कॉल एप से लड़की की आवाज में बीमा धारकों के पास फोन करता था। फोन करने में अलग-अलग नंबर का इस्तेमाल करता था। बीमा धारक को विश्वास में लेने के लिए आरोपी स्वयं बीमा कंपनी का उच्च अधिकारी बनकर भी बात करता था। फंसने के बाद लोगों से ऑनलाइन बैंक अकाउंट में पैसा मंगवाता था। एक पॉलिसी पर 10 प्रतिशत कमीशन लेता था। पैसा आने के बाद पॉलिसी नवीनीकरण का फर्जी प्रमाणपत्र जारी करता था। उसने गूगल से एचडीएफसी कंपनी के कर्मचारी रवि शर्मा का आईकार्ड डाउनलोड किया था। इससे बीमा धारकों को गुमराह करता था।
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धोखाधड़ी में 2 वर्ष से था सक्रिय
आरोपी अमित ने नोएडा के सेक्टर-2 स्थित एसएमसी इंश्योरेंस कंपनी में दो वर्ष तक टीएसओ पद पर नौकरी थी। आरोपी हरियाणा बोर्ड से 10वीं तक पढ़ा है। नौकरी के दौरान आरोपी ने कंपनी से बीमा धारकों का डाटा चुराना शुरू किया। डाटा चोरी करने के बाद नौकरी छोड़ दी। इसके बाद से धोखाधड़ी में लिप्त हो गया। आरोपी तीन खातों का इस्तेमाल करता था।
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यह सामान हुआ बरामद
बीमा धारकों का डाटा, मोबाइल, नोटबुक, बिलबुक, फोन-पे क्यूआर कोड, फोन-पे कार्ड स्वाइप मशीन, बाॅयोमैट्रिक मशीन, एक मोहर, स्टेशनरी, पेन ड्राइव, आरोपी के अलग-अलग पतों के पैनकार्ड व आधार कार्ड, आईटी रिटर्न, जीएसटी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, एग्रीमेंट सेल लेटर, कई लोगों के आधार कार्ड।
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