नोएडा एसटीएफ और खुर्जा नगर पुलिस ने संयुक्त रुप से कार्रवाई करते हुए सोमवार देर रात मुठभेड़ में तीन शार्प शूटरों को धर दबोचा। आरोपी खुर्जा क्षेत्र में जमीन विवाद में एक पैथॉलॉजी लैब संचालक की हत्या की योजना बना रहे थे और वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे।
तीनों आरोपियों को देर शाम न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि सोमवार देर रात खुर्जा नगर पुलिस व एसटीएफ नोएडा की टीम खुर्जा क्षेत्र में गश्त कर रही थी।
इस दौरान उन्हें सूचना मिली कि एक जमीन विवाद में खुर्जा निवासी सूर्य प्रताप सिंह भाड़े के हत्यारे सचिन कुमार व राजू के साथ अपने घर पर बैठकर हथियारों की साफ सफाई कर रहा है।
साथ ही आरोपी उस्मापुर निवासी पैथॉलॉजी लैब संचालक अर्जुन की हत्या करने की योजना बना रहा है। सूचना मिलते ही दोनों टीमों ने सूर्य प्रताप सिंह के घर पर दबिश देकर तीनों आरोपियों को धर दबोचा। आरोपियों के पास से पुलिस ने एक पिस्टल व दो तमंचे भी बरामद किए हैं।
इसलिए करना चाहते थे हत्या
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सूर्य प्रताप के पिता ने वर्ष 1993 में कृष्णा देवी पत्नी शंकर लाल निवासी कानपुर से वसीयत कराई थी। जिस पर खुर्जा निवासी शिवकुमार व अर्जुन पुत्र रामलाल निवासी गांव उस्मापुर ने पावर आफ अटार्नी करा ली थी।
जमीन विवाद पर केस को भी जीत लिया था। जिसके बाद प्रशासन ने उन्हें उक्त जमीन पर कब्जा भी करा दिया था। लेकिन, उक्त जमीन पर सूर्य प्रताप व उसका भाई हेमंत एक सीसीटीवी का आफिस चला रहे थे। जिसे अर्जुन और शिवकुमार ने तुड़वा दिया था। इसी को लेकर सूर्य प्रताप व उसके भाई हेमंत ने अर्जुन की हत्या की योजना बनाई थी।
ऐसे बनाई गई थी योजना
सूर्य प्रताप एक शातिर किस्म का अपराधी है। बीते दिनों उस पर 25 हजार रुपये का इनाम गाजियाबाद पुलिस ने घोषित किया था। लेकिन, आरोपी को करीब तीन माह पूर्व खुर्जा नगर पुलिस ने दबोच कर जेल भेज दिया था। जेल में रहने के दौरान ही सूर्य प्रताप की मुलाकात सचिन से हुई थी।
इस दौरान जेल में ही दोनों ने तय किया था कि जेल से निकलने के बाद अर्जुन की हत्या की जाएगी। इसके एवज में 15 लाख रुपये सचिन को देने की बात तय हुई थी। आरोपी राजू सचिन के गांव का ही निवासी है, सचिन ने उसे हत्या में शामिल करने के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही थी।
हेमंत को अस्पताल में भर्ती कराने का था प्रयास
हत्या करने पर आरोपियों को हेमंत के पकड़े जाने का डर था। इस कारण आरोपी हेमंत को किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना चाहते थे। पहले हत्या की घटना छह या सात सितंबर को अंजाम देनी थी। लेकिन, हेमंत के अस्पताल में भर्ती न हो पाने के कारण इरादा बदल दिया गया था।
मंगलवार को देना था वारदात को अंजाम
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह अर्जुन की नवदुर्गा रोड स्थित पैथॉलॉजी लैब पर मंगलवार को खून टेस्ट कराने के बहाने जाते। इस दौरान ही उसकी हत्या को अंजाम देना था। लेकिन, पुलिस ने सोमवार देर रात को ही तीनों आरोपियों को धर दबोचा।