बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयदशमी सोमवार को शहर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर शहर में चार स्थानों पर बड़े स्तर पर रावण कुनबे का दहन किया गया। अहंकारी दशानन पर भगवान श्रीराम ने अंतिम बाण चलाकर घमंड का तोड़ दिया।
इस दौरान भगवान राम की विजय के साथ ही लोगों में खुशी की लहर छा गई। इस मौके पर दशहरा मैदानों में भव्य आतिशबाजी की गई। साथ ही लोगों ने बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले दहन के साथ सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लिया।
दहशरा पर्व के लिए दिनभर शहर में उत्सव का माहौल रहा है। शहर के विभिन्न दशहरा मैदानों पर सूर्य अस्त के बाद करीब 30 स्थानों पर पुतले दहन किए गए। जैसे ही सत्य के प्रतीक भगवान राम ने अहंकारी रावण के पुतले पर अग्नि बाण चलाया वैसे ही रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले आतिशबाजी के धूमधड़ाके के साथ धू-धू करके जल उठे।
अहंकार और अधर्म के प्रतीक रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतलों जब दहन किया गया तो दशहरा मैदान श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। आतिशबाजी और पटाखों की तेज आवाज के साथ रावण के पुतलों का दहन किया गया। सेक्टर-12 दशहरा मैदान में लोगों को इस वर्ष अलग अंदाज में रावण का कुनवा देखने को मिला।
भारत विकास परिसर के पदाधिकारी अमर बंसल ने बताया कि रावण के सिर, मुंह, कान और हाथ में तलवार को लाइट से सजाया गया। सूरज डलते ही रावण का मुकुट रोशनी से जगमगाने लगा। मुंह से आग निकलने लगी। इसके बाद धार्मिक रीति रिवाज से रावण के कुनवे का दहन किया गया।
रावण दहन से पहले शहर के विभिन्न इलाकों में भगवान राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान जी की मनमोहक झांकियों की शोभायात्रा निकाली गई। कई दशहरा मैदानों में राम-रावण संवाद और राम रावण के बीच भीषण युद्ध के मंचन के बाद ही पुतलों को अग्नि दी गई।
रावण के पुतले में आग लगते ही सिर धड़ हाथ पैर के अलग-अलग हिस्से धू-धू करके जलने लगे। लोग परंपरा के मुताबिक जलते हुए रावण की लकड़ियों को घर ले गए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस व्यवस्था पूरी तरह चाक चौबंद रही।
90 फुट के रावण को देखने उमड़े दर्शक
सेक्टर-30 में शहर के सबसे बड़े रावण का दहन किया गया। एक दिन पहले ही मैदान में रावण के कुनवे के पुतले खड़े कर दिए गए थे। इसके साथ मेघनाद और कुंभकर्ण की उंचाई भी 80-80 फुट के पुतले लोगों के आकर्षद का केंद्र रहे। सोमवार को इन्हें देखने के लिए दूर-दराज इलाकों से लोग दहशरा मैदान पहुंचे।
ईको फ्रेंडली पुतलों का हुआ दहन
एनआईटी दशहरा ग्राउंड, सेक्टर-16, सेक्टर-12 हुडा ग्राउंड, सेक्टर-30 ग्राउंड समेत शहर में एक दर्जन से अधिक जगहों पर रावण के पुतले दहन किए गए। इस बार सभी पुतलों को ईको फ्रेंडली बनाया गया था। पहले तेज आवाज और ज्यादा धुंआ वाले अनार बम लगाए जाते थे। इस बार कोल्ड बम लगाए गए, जिससे दहन के दौरान कम आवाज और धुआं निकला।
दशहरा मैदान के मेलों में बच्चों की मस्ती
दशहरा मैदानों में बच्चों ने खूब मस्ती की। बच्चों के लिए मेलों में झूले, ऊंट-हाथी की सवारी, खेल खिलौने, चाट पकौड़ी का भरपूर इंतजाम था। कुछ बच्चे झूलों पर व्यस्त रहे, तो कुछ सवारी करने में व्यस्त रहे। दशहरा मेले की वजह से दशहरा मैदान की सड़कों पर नो एंट्री की गई। सोमवार सुबह ही लोग अपने बच्चों को मेला घूमाने पहुंचने लगे। लोगों ने बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले दहन के सेल्फी ली।