नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो रूट के ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की रूपरेखा तैयार हो गई है। इस रूट के 21 स्टेशनों पर सिग्नल और मेट्रो संचालन कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) पर आधारित होगा।
ये ऑटोमैटिक सिस्टम होगा, जिसे तैयार करने के लिए 320 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मेट्रो की रफ्तार, पॉजिशन, रूट, ब्रेकिंग डिस्टेंस, लाइन सिग्नल, ट्रेवल डायरेक्शन और ट्रैफिक मैनेजमेंट समेत सुरक्षा से जुड़ी सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन ऑटोमैटिक किया जा सकेगा।इस सिस्टम के जरिये इस रूट पर बिना ड्राइवर वाली मेट्रो भी चलाई जा सकेगी।
दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) ने नोएडा मेट्रो रेल कंपनी (डीएमआरसी) की ओर से ट्रेन कंट्रोल, सिग्नल और टेली कम्यूनिकेशन सिस्टम के डिजाइन, मैन्यूफेक्चरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग के लिए टेंडर जारी कर दिया है।
बिना ड्राइवर के चल सकेगी नोएडा-ग्रेनो मेट्रो
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो रूट का ट्रेन कंट्रोल सिस्टम कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) के तहत मूविंग ब्लॉक टेक्नोलॉजी पर काम करेगा।
दरअसल, मेट्रो की 2010 से चालू लाइन-5 और लाइन-6 पर सेमी ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन (एटीओ) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगले साल चालू होने वाली लाइन-7 (मजेंटा लाइन) पर सीबीटीसी का इस्तेमाल होगा, जिसमें बॉमबार्डियर ट्रांसपोर्टेशन पहली बार बिना ड्राइवर के सर्विस देगा।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो रूट पर का ट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी सीबीटीसी पर आधारित है। इसके लिए 18 मई से 30 जून तक टेंडर भरे जाएंगे। कंपनी का चयन करके दिसंबर-2017 तक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम तैयार हो जाएगा।
ऐसे काम करता है सीबीटीसी
सीबीटीसी मूविंग ब्लॉक सिस्टम पर काम करता है, जो फिक्स ब्लॉक सिस्टम से ज्यादा कारगर है। ये सिस्टम ट्रेन की पॉजिशन और ब्रेकिंग कर्व के साथ दो मेट्रो के बीच की दूरी की सटीक गणना रेडियो सिग्नल के जरिये भेजता है।
इससे आगे-पीछे वाली मेट्रो की रफ्तार को ऑटोमैटिक नियंत्रित किया जा सकता है। जांच के बाद किया जाएगा पासमेट्रो के सिग्नल और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम को सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की निगरानी में मेट्रो रेलवे सेफ्टी कमिश्नर द्वारा जांच पड़ताल के बाद पास किया जाएगा।
रेल मंत्रालय के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) से भी गुजरना होगा।