साल दर साल मौसम का मिजाज बदलता जा रहा है। इस साल तो गर्मी पीछा ही नहीं छोड़ रही। आलम यह है कि जिस नवंबर में सर्दी सताने लगती थी, उसमें एसी पंखे चल रहे हैं। तापमान 30 के पार पहुंच रहा है।
पिछले साल इस दौरान कोहरा-पाला पड़ना शुरू हो गया था। मौसम विज्ञानी इसे प्रकृति पर ग्लोबल वार्मिंग का असर मानते हैं।
मौसम चक्र गड़बड़ाया-मौसम चक्र गड़बड़ा गया है। सर्दी के मौसम में भी लोगों को एसी-पंखों का सहारा लेना पड़ रहा है। नवंबर में दिन का तापमान 28-33 डिग्री तक पहुंच रहा है।
रात का तापमान भी 17-20 डिग्री है। ऐसे में लोग पसीने से तर हो रहे हैं। हाफ शर्ट में घूम रहे हैं और स्वेटर-जर्सी का कहीं अता-पता नहीं है।
बिजली की खपत बढ़ी-पावर कारपोरेशन रिकार्ड के अनुसार इस बार 10 नवंबर तक की एनर्जी पिछले साल की तुलना में 32 फीसदी ज्यादा रही है। यानी लोगों ने 32 फीसदी ज्यादा बिजली खर्च की है। लोगों के घरों का बजट पिछले साल इसी अवधि की तुलना में करीब डेढ़ गुना ज्यादा है।
मौसम वैज्ञानिक डा. विवेक राज ने बताय कि मौसम पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस इफेक्ट है। बारिश न होने के चलते सूखा पड़ने का प्रभाव भी झेलना पड़ रहा है।
मौसम में उथल-पुथल झेलनी पडेगी। यदि जल्दी ही बारिश नहीं होती है तो सर्दी कभी एक साथ कम और कभी एक साथ ज्यादा होती रहेगी।
हालांकि अब 13 नवंबर से एक सप्ताह के लिए तीव्र सर्दी का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद मौसम में एकरूपता नहीं आ रही है। ग्लोबल वार्मिंग का असर भी प्रकृति पर पड़ने लगा है।
आरडब्ल्यूए फेडरेशन अध्यक्ष डा. आरके आर्य ने बताया कि नवंबर माह अच्छी सर्दी के लिए जाना जाता है। मध्य अक्तूबर से ही गुलाबी सर्दी पड़नी शुरू हो जाती थी। मौसम का यह हाल पहले कभी नहीं देखा।
नवंबर माह में शुरू से ही अच्छी सर्दी पड़नी शुरू होनी चाहिए थी। बूंदाबांदी, तेज ठंडी हवा और कोहरा इस दौरान पड़ने लगता था। नवंबर मेें मार्च जैसा हाल है।