इन दिनों दिल्ली में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार चला रही आम आदमी पार्टी अजीबो-गरीब समस्याएं झेल रही है। चौंकाने की बात ये है कि ये समस्याएं पार्टी के ही लोग खड़ी कर रहे हैं।
पहले पार्टी के गठन में प्रमुख सहयोगी व मुखर नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से मतभेद हुआ। उसके बाद एक-एक कर के पार्टी दो खेमें में बंट गई।
लेकिन अब जो नई समस्या है, वो इन सबसे इतर और विकट है। दरअसल, पार्टी में चल रही अंदरूनी कलह को देखते हुए पार्टी को लेकर लोगों के मन जो छवि थी वो बिगड़ रही है।
और खड़ी हो गई विकट समस्या
दरअसल, आम आदमी पार्टी गठन ही जनता के सहयोग से हुआ था। साथ ही एक राजनीतिक पार्टी के गठन के वक्त पड़ने वाली तमाम आवश्यकताओं के लिए भी सहयोगियों ने ही काम किया था, जैसे लोगो डिजाइन, हेल्पलाइन के प्रस्ताव आदि।
इसके अलावा जो सबसे प्रमुख बात है वो ये कि चुनाव लड़ने से लेकर तमाम आर्थिक जरूरतों के लिए आप अपने चंदे व दानकर्ताओं पर निर्भर रहती है। अब दुविधा ये है कि हाल दिनों में कुछ सहयोगी व दानकर्ता पार्टी से नाराज हो गए हैं।
ऐसे वे अपनी वे चीजें वापस मांग रहे हैं, जो उन्होंने पार्टी को दान की थी। हाल ही एक समर्थक ने अपनी कार मांग ली, तो एक ने वो डिजाइन, जो उसने आप के लोगो के लिए बनाई थी।
पर ये केजरीवाल से कोई नहीं मांग सकता
बहुत मुमकिन है कि वर्तमान चल रहे ट्रेंड में कई अन्य लोग आप से नाराज होकर तमाम चीजें लौटाने की मांग करें। इसमें आप के देश में फैले कई दफ्तर, पार्टी की टोपी डिजाइन आदि।
लेकिन इस स्थिति में एक ऐसी चीज है, जो केजरीवाल से कोई नहीं मांग सकता है, और वो चीज है आम आदमी पार्टी का नाम। क्योंकि आम आदमी पार्टी को उसका नाम खुद अरविंद केजरीवाल ने दिया है।
इसलिए कोई शख्स इस नाम पर अपना अधिकार नहीं जमा सकता। न ही इसे लौटाने की मांग कर सकता है।