दिल्ली में शासक बदले, प्रशासक बदले, लेकिन नहीं बदली तो उत्तर-पूर्वी लोकसभा इलाके की तस्वीर। परिसीमन में इलाका तो बंटा, लेकिन यहां की जनता विकास की बाट अभी भी जोह रही है।
यूपी बॉर्डर से जुड़े उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट को मिनी भारत कहा जाए तो कोई गलत नहीं होगा। इस इलाके में सभी धर्म, जाति, वर्ग और राज्य के लोग बसते हैं।
यह सीट चूंकि यूपी से जुड़ी है, लिहाजा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग बड़ी संख्या में हैं। इसी तरह पूर्वांचल और उत्तरांचल के लोगों की भी काफी तादाद है। यहां मुस्लिम आबादी भी अन्य सीटों से अधिक है। फिलहाल दो विधायक भी मुस्लिम समाज से ही हैं।
हालात बदतर फिर भी टेंशन फ्री रहे नेताजी
इस बार बाबरपुर इलाके में विकास ही मुख्य मुद्दा है। ताराचंद का कहना है कि क्षेत्र में ट्रैफिक की समस्या से लोग रोजाना दो-चार होते हैं, तो अस्पतालों की हालत ठीक नहीं होने से स्वास्थ्य व्यवस्था खतरे की घंटी बजाती है। शिक्षा की बात करें तो डीयू का अंबेडकर कॉलेज ही मुख्य कॉलेज है।
इस लोकसभा के तिमारपुर विधानसभा में डीयू का नॉर्थ कैंपस है। घोंडा, सीमापुरी, सीलमपुर, बाबरपुर, मुस्तफाबाद, बुराड़ी इस लोकसभा के ऐसी विधानसभाएं हैं, जहां की संकरी गलियां, बेतरतीब विकास, बिजली की समस्या और गंदगी यहां की जिंदगी का हिस्सा हैं।
मनीष मिश्रा कहते हैं कि अनधिकृत नियमित और अनियमित कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
सिर्फ नाम की राजधानी है, असलियत तो...
ट्रैफिक जाम से निजात के लिए इन दिनों कुछ प्रोजेक्ट पर जोर-शोर से काम चल रहा है। सिग्नेचर ब्रिज और वजीराबाद एक्सप्रेस वे का निर्माण चल रहा है। बुराड़ी से रोहिणी जेल के आगे तक ओवरहेड रोड का निर्माण किया जा रहा है। सबोली के करीब मेट्रो स्टेशन बनाने का रास्ता भी साफ हुआ है, तो सीलमपुर से गोकुलपुरी तक ड्रेन का निर्माण हुआ है।
वजीराबाद के विकास कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों के लोग आज भी ऐसे रहते हैं जो कहने भर के लिए राजधानी में हैं। जहांगीरपुरी, सीमापुरी, नंद नगरी, सीलमपुर और गोकुलपुरी झुग्गी में रहने वालों की स्थिति भी किसी से छुपी नहीं है।
इतना जरूर है कि तिमारपुर विधानसभा के कुछ इलाके ऐसे हैं, जो दिल्ली की पॉश कॉलोनी में शुमार हैं। यहां मेट्रो की कनेक्टिविटी है। इस सीट पर भाजपा से मनोज तिवारी, कांग्रेस से जेपी अग्रवाल और AAP से प्रो. आनंद कुमार चुनाव मैदान में हैं।