दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को करीब 12 वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक दुर्घटना संबंधी मामलों में पीड़ितों की मुआवजे संबंधी याचिका के निपटारे हेतु क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति नहीं हुई है।
हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए डीएमआरसी को क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति न होने पर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने मेट्रो के अधिवक्ता को अगली सुनवाई तक स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही।
अदालत ने चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन में हुई दुर्घटना में मृत युवक के आश्रितों द्वारा 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 फरवरी तय की है।
याचिकाकर्ता आसिया बेगम ने आरोप लगाया कि उसके 25 वर्षीय बेटे खान मोहम्मद की मौत मेट्रो की लापरवाही से हुई थी। उसने मुआवजे के लिए आवेदन किया, लेकिन मेट्रो ने उसके तर्क को इस आधार पर स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि दुर्घटना में मेट्रो की लापरवाही नहीं थी।
मेट्रो में अभी तक क्लेम कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की गई जिससे मेट्रो प्रशासन मनमर्जी चला रहा है। सुनवाई के दौरान मेट्रो के अधिवक्ता ने बताया कि उनकी नीति के तहत दुर्घटना में यदि कोई अक्षम होता है तो उसे दो लाख रुपये और मरने पर चार लाख रुपये देने का प्रावधान है। मामले में युवक की लापरवाही के कारण ही दुर्घटना हुई ऐसे में उसे मुआवजा प्रदान नहीं किया गया।