दिल्ली के थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे को दिल्ली पुलिस खाली बंदूक की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि उसकी फुटेज उनके खिलाफ इस्तेमाल न हो सकें।
थानों के सीसीटीवी कैमरों को केवल निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है, रिकॉर्डिंग के लिए नहीं। यह जानकारी खुद दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर ने अदालत को दी है।
तीस हजारी अदालत की महानगर दंडाधिकारी मोना टी केरकेटा की अदालत में पेश होकर थाना रूप नगर के सब इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने रिपोर्ट दी कि थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जाता है, फुटेज की रिकॉर्डिंग नहीं की जाती। पुलिस ने यह रिपोर्ट दुष्कर्म के एक मामले में अदालत के निर्देश पर दी है।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस पर दिशा-निर्देशों की अनदेखी व दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए रूप नगर थाने की सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी।
आवेदन पर बहस करते हुए अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि पीड़िता का बयान जानबूझकर महिला अधिकारी के बजाय पुरुष अधिकारी ने दर्ज किया। पुलिस ने ऐसा आरोपी से मिलीभगत के कारण किया।
पीड़ित पक्ष ने रूप नगर थाने में लगे सीसीटीवी की एक जनवरी 2014 की सुबह दस बजे से शाम पांच बजे की फुटेज मंगाने और उसे केस फाइल पर लगाने की मांग की थी। उसके अलावा आरोपी मोहम्मद राशिद की दुकान की सीसीटीवी फुटेज भी मांगे थे। दुकान की फुटेज पुलिस ने बिना कोर्ट की अनुमति के ही सीएफएसएल जांच के लिए भेज दी।
पेश मामले में आरोपी मोहम्मद राशिद ने 31 जनवरी 2013 की दोपहर पीड़िता से दुष्कर्म का प्रयास किया था। पीड़िता का आरोप था कि इसके बाद उसने एक जनवरी 2014 को दी थी कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्योंकि स्थानीय थाने की पुलिस उसके साथ है।