पूरे देश को हिलाकर रखने वाले वसंत विहार गैंगरेप के दोषी ठहराए गए नाबालिग को सुधार गृह से रिहा कर दिया गया। नाबालिग के मूल बदायूं स्थित गांव के लोगों द्वारा उसे स्वीकार करने से इंकार के बाद उसके रिस्तेदारों ने भी उसे अपने पास रखने से मना कर दिया।
जनक्रोश को देखते हुए कि सुधार गृह से बाहर निकलते ही कहीं उसकी हत्या न हो जाए पुलिस उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। फिलहाल वह उसे कागजों में ही रिहा किया गया है और वह अब भी पुलिस की सुरक्षा में है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने उसकी सुरक्षा करने के लिए एक एनजीओं को सौंप दिया है और जब नाबालिग कहीं जाने की इच्छा नहीं जताता तो उसे वहीं रखा जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नाबालिग को सुनाई गई सजा पूरी होने केबाद बाल सुधार गृह ने उसे अपनी हिरासत से रिहा कर दिया। यदि उसे रिहा नहीं किया जाता तो उसकी हिरासत गैरकानूनी बन जाती।
इसलिए करना पड़ा रिहा
इसी के ध्यानार्थ सुधार गृह ने अपनी हिरासत से रिहा करना ही उचित समझा। दूसरा बाल सुधार गृह के समक्ष यह भी मुद्दा था कि हाईकोर्ट ने हालही में दिए फैसले में उसकी रिहाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर विचार किया कि यदि उसे तय कानून से ज्यादा हिरासत में रखा जाता है तो संविधान के तहत उसे मिले अधिकारों व उसकी स्वतंत्रता का हनन होगा।
उधर दिल्ली महिला आयोग द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में शनिवार की देर रात्रि दायर विशेष अनुमति याचिका के आधार पर भी अवकाशकालीन खंडपीठ ने रिहाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।
'कहां है इसका किसी को पता नहीं'
ऐसे में बाल सुधार गृह के समक्ष दोहरी परेशानी आ गई कि जब हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी रिहाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया तो वह किस कानून के तहत उसे रिहा करने से मना कर सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अब नाबालिग को सुधार गृह अधिकारियों ने कागजों में उसे रिहा करते हुए उसे स्पष्ट कर दिया कि वह कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र है।
अब पासा दिल्ली पुलिस के पाले में आ गया है। पुलिस को उसे हर हाल में सुरक्षा देनी होगी। फिलहाल वह पुलिस की सुरक्षा में है और जब तक वह चाहे सुरक्षा का हवाला देकर बाल सुधार गृह या फिर कहीं अन्य स्थान पर रह सकता है।
नाबालिग के वकील एपी सिंह ने बताया कि अब वह पुलिस की सुरक्षा में है, कहां है इसका किसी को पता नहीं है।
जनक्रोश से डरे रिस्तेदार
वकील एपी सिंह ने माना कि पुलिस व बाल सुधार गृह अधिकारियों ने उसकी सुरक्षा के ध्यानार्थ रिस्तेदारों से संपर्क कर नाबालिग को अपने पास रखने के लिए मनाने का प्रयास किया था।
पुलिस से सुरक्षा व्यवस्था का भी आश्वासन दिया। जनक्रोश को देखते हुए सभी रिस्तेदारों ने उसे अपने पास रखने से इंकार कर दिया।
उधर बदाऊं में भी उसके विरोध को देखते हुए पुलिस ने उनके मुवक्किल को वहां ले जाने की योजना पर काम बंद कर दिया है।