अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने तिहाड़ की अपील पर संज्ञान लेते हुए कहा कि चारों दोषी अपने कानूनी उपायों को लेकर शुक्रवार तक जवाब दायर करें और बताएं की क्या किसी दोषी की कोई याचिका लंबित है या नहीं।
इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने 31 जनवरी को दोषियों की फांसी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी, क्योंकि बचाव पक्ष ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि दोषी विनय की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है, लिहाजा दोषियों को एक फरवरी को फांसी नहीं दी जा सकती।
हालांकि उसी दिन राष्ट्रपति ने दोषी विनय की याचिका खारिज कर दी थी। चूंकि दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी को फांसी से पहले 14 दिनों का समय दिया जाता है, इसलिए कोर्ट ने फांसी को अगले आदेश तक टाल दिया था।
इसके बाद केन्द्र सरकार ने दोषियों की फांसी पर पटियाला हाउस कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर हाईकोर्ट ने एक और 2 फरवरी को विशेष सुनवाई की थी। कोर्ट ने बुधवार को केन्द्र की याचिका को खारिज कर दिया था और पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा दोषियों की फांसी पर लगाई गई रोक के फैसले को रद्द करने से भी इंकार कर दिया था।
पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी को चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फांसी देने के लिए पहला डेथ वारंट जारी किया था। हालांकि, एक दोषी की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित रहने की वजह से उन्हें फांसी नहीं दी जा सकी, जिसके बाद में ट्रायल कोर्ट ने 17 जनवरी को दोषियों के खिलाफ दूसरा डेथ वारंट जारी करते हुए फांसी की तारीख एक फरवरी तय की, लेकिन 31 जनवरी को फिर से पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषी विनय की दया याचिका लंबित होने के कारण फांसी को अगले आदेश तक टाल दिया था।
पवन के पास है क्यूरेटिव और दया याचिका का विकल्प
दोषी मुकेश, विनय और अक्षय के क्यूरेटिव व दया याचिका को सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति द्वारा खरिज कर दिया गया है। अब दोषी पवन के पास क्यूरेटिव और दया याचिका दायर करने के कानूनी उपायों का विकल्प बाकी है। इसके साथ ही केन्द्र द्वारा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती की याचिका भी अभी लंबित है।