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निर्भया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चलाया था 'डंडा', रातों रात काले शीशे हो गए थे सफेद!

Fri, 20 Mar 2020 06:28 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पहले 28 दिन में 67 हजार से ज्यादा वाहनों पर लगी काली फिल्म उतारी गईं
  • तीन माह के दौरान एक लाख 41 हजार वाहनों से काली फिल्म उतारीं
  • जिस बस में हुई थी दरिंदगी, उसके शीशों में लगी थी काली फिल्म और शीशे 
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nirbhaya gangrape bus - फोटो : File
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विस्तार
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देश को दहला कर रख देने वाले निर्भया मामले के बाद लोगों के जीवन में कई अहम बदलाव देखने को मिले थे। कानून बदले तो लोगों की आदतें भी बदल गईं। सुप्रीम कोर्ट ने कई बातों पर स्वतः संज्ञान लेकर ट्रैफिक नियमों में परिवर्तन कर दिया। कुछ नियम जस्टिस जेएस वर्मा आयोग की सिफारिशों के आधार पर बदले गए। वाहनों के शीशों पर दिखाई देने वाली काली फिल्में उतर गईं।

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सबसे पहले दिल्ली पुलिस मुख्यालय में खड़ी सभी गाड़ियों की फिल्में हटाई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि वाहन पर किसी भी स्तर की कोई फिल्म नहीं लगेगी। पर्दे और विंडो शील्ड भी नहीं लगाए जा सकते। गाड़ी सरकारी हो या प्राइवेट, सभी से काली फिल्म हटा दी गईं।
 

बता दें कि जिस बस में निर्भया के साथ दरिंदगी हुई थी, उस वक्त बस में पर्दे लगे हुए थे। कुछ शीशों पर काली फिल्म भी थी। जांच कमेटियों ने भी ये सवाल उठाया कि अगर बस में काली फिल्म या पर्दे नहीं होते, तो इतनी बड़ी दरिंदगी को टाला जा सकता था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 4 मई से नियमित चेकिंग अभियान शुरू कर दिया था।

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पहले 28 दिन में 67 हजार से ज्यादा वाहनों पर लगी काली फिल्म उतारी गईं। हालत ये हो गई थे कि दो-तीन माह में करीब अस्सी फीसदी वाहनों से फिल्म हटा ली गई। काली फिल्म हटाने का सौ फीसदी टारगेट पूरा करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने अपना अभियान तेज कर दिया। दिल्ली में तीन माह के दौरान एक लाख 41 हजार वाहनों से काली फिल्म उतारकर उनका चालान कर दिया गया।
 

जल्द ही वाहन चालकों ने काले शीशे और फिल्म का तोड़ निकाल लिया था। चूंकि तब तक ट्रैफिक पुलिस के पास ऐसा कोई मापक यंत्र नहीं था, जो निर्धारित मानकों के मुताबिक काली फिल्म और शीशे की पहचान कर सके। इस वजह से सरकारी वाहनों पर काले शीशे या हल्की फिल्म लगी हुई मिलीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले वाहनों पर 70:50 के अनुपात में फिल्म या काला शीशा लगता था। मतलब आगे-पीछे के शीशे का दृश्यता स्तर 70 फीसदी और साइड के शीशों का स्तर 50 फीसदी रहता था। निर्भया मामले के बाद गाड़ियों से फिल्म पूरी तरह उतर गई।

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स्कूलों के लिए बना दिए गए ये नियम

  • नियमानुसार, स्कूल वैन में बस की भांति कंडक्टर का होना जरूरी कर दिया गया।
  • ज्वाइंट सीपी (ट्रैफिक) सत्येंद्र गर्ग ने स्कूल संचालकों और वाहन मालिकों को नए नियम पूरे करने के लिए समय दे दिया
  • यदि कोई प्राइवेट वाहन कमर्शियल आधार पर स्कूली बच्चों को ले जाता हुआ दिखा तो उसे रजिस्ट्रेशन कार्ड (आरसी) का उल्लंघन माना गया।
  • दिल्ली में किसी भी प्राइवेट वाहन का कमर्शियल कार्यों में इस्तेमाल अवैध माना गया 
  • स्कूल वैन में निर्धारित क्षमता के डेढ़ गुना से ज्यादा बच्चे न हों, इस नियम की अवहेलना होने पर आरसी उल्लंघन के तहत कार्रवाई की गई।
  • केवल प्राचार्य की तरफ से मंजूर रूट प्लान मान्य होगा। 
  • जो स्कूल की अपनी बसें होंगी, उनका पीला रंग होगा। किराए या फिर दूसरी अथॉरिटी की बसों का रंग उनके परमिट अनुसार रहेगा। 
  • स्कूल बस और वैन में विद्यार्थियों के बैग रखने के लिए अलग से रैक की व्यवस्था करना होगी। 
  • यदि किसी स्कूल बस-वैन में बच्चे बैठे हैं तो उसे जब्त नहीं किया जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए जाएंगे। 
  • ओवरस्पीड वाले वाहनों का चालान कटेगा और उनकी साप्ताहिक रिपोर्ट परिवहन विभाग व शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी। 
  • पहली बार ओवरस्पीड का उल्लंघन होने पर परिवहन विभाग की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
  • दूसरी बार उल्लंघन होने पर चालक का ड्राइवर लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
  • सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन होने पर परमिट रद्द करने का अधिकार एसीपी ट्रैफिक के पास रहेगा।
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