नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने हिंडन कैनाल में कूड़ा-कचरा और मलबा फेंकने के लिए पूर्वी दिल्ली के वसुंधरा इंक्लेव की 45 सोसाइटी को तलब कर चुकी है। अब इसके इर्द-गिर्द क्षेत्र में मौजूद अवैध कॉलोनियों की समितियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
पूर्व नोटिस के बावजूद अवैध कॉलोनियों की समितियों की ओर से ट्रिब्युनल के समक्ष किसी के हाजिर न होने पर ग्रीन बेंच ने यह निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को जेपी शर्मा के मामले की सुनवाई की। इस दौरान दौरान अवैध कॉलोनियों की ओर से ट्रिब्युनल में कोई भी पेश नहीं हुआ।
ट्रिब्युनल के पूर्व आदेश के मुताबिक नोटिस दिया जा चुका है
वहीं पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) और दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने जानकारी दी कि क्षेत्र में मौजूद सभी प्रमुख अवैध कॉलोनियों को ट्रिब्युनल के पूर्व आदेश के मुताबिक नोटिस दिया जा चुका है।
बेंच ने अपने निर्देश में कहा कि ट्रिब्युनल में अनुपस्थित होने वाले सभी समितियों के इंचार्ज के खिलाफ 10 हजार रुपये के मुचलके पर जमानती वारंट जारी किया जाता है।
इन सभी कॉलोनियों के द्वारा डंप किया जाने वाला ठोस कचरा (एमएसडब्ल्यू) व अन्य कचरा न सिर्फ पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सीवेज पाइपलाइन भी इसकी वजह से पूरी तरह ब्लॉक है। बेंच ने कहा कि यह जमानती वारंट की कार्रवाई संबंधित एसएचओ के जरिये होगी।
45 कॉलोनियों को कारण बताओ नोटिस
बेंच ने वसुंधरा इंक्लेव की 45 कॉलोनियों के आरडब्ल्यूए को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है वह बताएं आखिर उन्होंने नाले और कैनाल में कूड़ा फेंकने के बजाए ठोस कचरे के प्रबंधन, संग्रहण, परिवहन और निस्तारण को लेकर काम क्यों नहीं किया?
बेंच ने सभी कॉलोनियों से इस संबंध में विस्तृत खाका भी तैयार कर ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश की गई तस्वीरों को देखने के बाद बेंच ने कहा कि सीवेज पाइपलाइन को ठोस कचरों के साथ अन्य कचरे व प्लास्टिक पूरी तरह ब्लॉक कर चुके हैं।
सभी कॉलोनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाता है। कॉलोनियां बताएं कि आखिर उन्होंने कूड़े के उपचार को लेकर समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की।
एसएचओ के खिलाफ भी जमानती वारंट
वहीं 45 कॉलोनियों की सोसाइटी की ओर से पेश वकील ने कहा कि न्यू अशोक नगर पुलिस स्टेशन के जरिये इलाके में अवैध निर्माण किया जा रहा है। इसके कारण नाला पूरी तरह ब्लॉक है। इसके कारण पर्यावरणीय क्षति हो रही है। पुलिस स्टेशन को शिफ्ट किए जाने की जरूरत है। इसके बाद बेंच ने संबंधित एसएचओ के खिलाफ भी जमानती वारंट जारी किया है।
मालूम हो कि संबंधित मामले में एनजीटी ने बीते वर्ष अगस्त महीने में वसुंधरा इंक्लेव की 45 कॉलोनियों के साथ एनजीटी ने ईडीएमसी को मयूर विहार, फेस वन, दल्लूपुरा गांव और न्यू अशोक नगर में भी मौजूद कॉलोनियों को नोटिस जारी करने को कहा था।
इसके अलावा सरकारी विभागों को फटकार लगाते हुए कहा था कि सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोप रहे हैं। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि कोई अपनी जिम्मेदारी निभाना नहीं चाह रहा। एक तरफ अथॉरिटी अपने प्रदर्शन में विफल है, दूसरी तरफ जनता के जरिये फेंके जा रहे कूड़े कचरे को रोकने में भी नाकाम है।