नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में यूपी सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वृंदावन में यमुना किनारे से सभी प्रकार की निर्माण सामग्री तत्काल हटाई जानी चाहिए।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ का यह आदेश याची आकाश वशिष्ठ की ओर से दाखिल याचिका पर आया है। पीठ ने इस आदेश के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया है।
याची का आरोप था कि रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के नाम पर वृंदावन में यमुना किनारे निर्माण कार्य किया जा रहा है। जबकि यह उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की तरफ से 16 मार्च, 2010 को जारी आदेश और एनजीटी की ओर से 20 मई, 2013 को जारी किए गए आदेश के खिलाफ है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि सिंचाई विभाग को यमुना रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए सशर्त अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया जा चुका है।