दिल्ली के गृह विभाग मंत्री आशीष सूद ने न्यू सीमापुरी में इमारत गिरने की दुखद घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे में चार लोगों की जान चली गई है। इस घटना की जांच उत्तर-पूर्वी जिले के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।
इस दुखद घटना पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए गृह मंत्री ने कहा की यह अत्यंत दुखद घटना है, जिसमें हमने अनमोल जिंदगियां खोई हैं। इस इमारत के गिरने की घटना के हर पहलू की गहन जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। किसी भी दोषी व्यक्ति या लापरवाही बरतने वाले अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी तत्काल प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है। वहीं, हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करना है, ताकि दिल्ली में भविष्य में इस तरह की दुर्घटना दोबारा न हो।
एक नजर में पढ़ें पूरा अपडेट-
- 7 अक्तूबर, 2026 को दोपहर लगभग 3 बजे दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक चार से पांच मंजिला आवासीय इमारत (मकान संख्या ई-402) ढह गई थी। यह इमारत मात्र 20 से 25 वर्ग गज के छोटे भूखंड पर बनी हुई थी।
- इस घटना से आसपास की तीन अन्य इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
- दिल्ली नगर निगम ने इन इमारतों को असुरक्षित घोषित करते हुए तत्काल खाली करा लिया था।
- स्थानीय स्तर पर की गई प्रारंभिक जांच के अनुसार, समीपवर्ती एक अनधिकृत निर्माण स्थल पर भारी और कंपन उत्पन्न करने वाली मशीनों से की जा रही तोड़फोड़ इस इमारत के गिरने का संभावित कारण बनी।
- क्षेत्र की आसपास की अन्य आवासीय इमारतों में भी संरचनात्मक कमजोरी देखी गई है। ये इमारतें बेहद छोटे भूखंडों पर बिना उचित संरचनात्मक कॉलम और बीम के बनाई गई हैं।
मजिस्ट्रियल जांच में इन पहलुओं की होगी पड़ताल
- इमारत गिरने की घटना से जुड़े सभी तथ्यों, परिस्थितियों और मूल कारणों का पता लगाना।
- भवन मालिकों, किरायेदारों या निजी व्यक्तियों द्वारा कानूनों, भवन निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जांच करना।
- सरकारी विभागों, नागरिक निकायों और उनके अधिकारियों की ओर से हुई किसी भी प्रकार की चूक, लापरवाही या विफलता की जांच कर जवाबदेही निर्धारित करना।
- दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, एजेंसियों और अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करना।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के क्रियान्वयन की समीक्षा करना व भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी एवं प्रभावी निवारक उपाय सुझाना।