देश का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान इन दिनों नए मास्टर प्लान पर काम कर रहा है। इसके तहत एम्स परिसर में कई ब्लॉक के अलावा आवासीय परिसर आदि शामिल हैं। अभी तक एम्स परिसर कई भागों में बंटा है। इन सब को आसपास लाने के बाद वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी की दिशा में आगे बढ़ने की योजना है।
एम्स परिसर की ऐसे बदलेगी सूरत
तय योजना के अनुसार एम्स के गेट नंबर-1 के पास राजकुमार अमृता कौर ओपीडी ब्लॉक के अलावा आसपास टीनशेड आदि में विभागों की ओपीडी संचालित हैं। मेडिकल जांच, रक्त नमूना काउंटर आदि के लिए अलग जगह हैं। इन सभी को एक ही इमारत में लाने के लिए ओपीडी ब्लॉक तैयार किया है। इस ब्लॉक के भूतल पर ही मरीज को कार्ड बनाने से लेकर रक्त नमूना जमा करने आदि की सुविधा मिलेगी। पास में ही पार्किंग भी मिलेगी।
अगर कोई मरीज एम्स की सिर्फ ओपीडी में ही जाता है तो वह सीधे ओपीडी में दिखाने के बाद अपने घर जा सकता है। उसे इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ठीक ऐसा ही सर्जरी ब्लॉक शुरू होने के बाद देखने को मिलेगा। अभी तक एम्स में छह माह से डेढ़ साल तक की वेटिंग मिल रही है, जबकि पीडिएट्रिक कार्डियो सर्जरी जैसे कुछ विभागों में वेटिंग चार से पांच वर्ष तक की है। सर्जरी ब्लॉक शुरू होने से काफी हद तक वेटिंग कम होने की उम्मीद एम्स प्रबंधन को है।
सर्जरी ब्लॉक : 200 बिस्तर, 12 ऑपरेशन थियेटर। इमारत होगी तैयार।
ओपीडी ब्लॉक : 570 कमरे, 10 हजार रोगियों की क्षमता प्रतिदिन, पूरी तरह से बनकर तैयार।
2020 में इन्हें भी पूरा करा सकता है एम्स
मदर एंड चाइल्ड ब्लॉक : 70 फीसदी से ज्यादा हो चुका है निर्माण कार्य, 425 बिस्तर होंगे।
प्राइवेट वार्ड : 80 फीसदी से ज्यादा निर्माण कार्य हो चुका, 113 कमरे होंगे।
बर्न एंड प्लास्टिक ब्लॉक : 85 फीसदी से ज्यादा निर्माण कार्य हो चुका, 100 बिस्तर होंगे।