तय समय में काम पूरा करने वाली दिल्ली मेट्रो ने पहली बार अपने तीसरे चरण के निर्माण में लेटलतीफी का नया रिकॉर्ड बना दिया है। तीसरे चरण की जिन लाइनों की डेडलाइन दिसंबर 2016 थी अब वह अप्रैल 2018 तक पहुंच गई है।
जमीन विवाद के चलते मेट्रो की तीन मुख्य लाइनों की मार्च तक मेट्रो डेडलाइन भी नहीं तय कर पा रही थी। मगर अब अप्रैल में विवाद सुलझने के बाद फेज तीन की सभी लाइनों की डेडलाइन तय कर दी गई है।
फेज तीन में कुल 160.5 किलोमीटर का निर्माण होना है। अभी तक इसमें से महज 23 किलोमीटर का ही परिचालन शुरू हो पाया है। बड़ी लाइनों के कुछ-कुछ सेक्शन पर ट्रायल चल रहा है।
मजलिस पार्क से शिव विहार लाइन
तीसरे चरण में बन रही पिंक लाइन मेट्रो की सबसे बड़ी 58.59 किलोमीटर लंबी लाइन है। 39.47 किलोमीटर एलिवेटेड और 19.11 किलोमीटर भूमिगत लाइन है, जिस पर 38 स्टेशन हैं। इसे दिसंबर 2016 तक पूरा होना था, लेकिन जमीन विवाद के चलते मार्च 2017 तक डीएमआरसी को पता नहीं था कि यह कब तक पूरा होगा। इस लाइन पर तीन प्वाइंट मायापुरी, त्रिलोकपुरी और हसनपुर गांव में 1755 वर्गमीटर जमीन को लेकर विवाद था।
डीएमआरसी का दावा है कि अब इस लाइन पर विवाद खत्म हो गया है और नई डेडलाइन अप्रैल 2018 तय कर ली गई है। मार्च 2017 तक इस लाइन पर 91.37 फीसदी काम हो चुका है। सितंबर 2017 तक मजलिस पार्क से लाजपत नगर और बाकी लाजपत नगर से शिव विहार तक की लाइन अप्रैल 2018 तक पूरी हो जाएगी।
जनकपुरी वेस्ट से बॉटेनिकल गार्डन
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तीसरे चरण की मजेंटा लाइन (जनकपुरी वेस्ट से बॉटेनिकल गार्डन) दूसरी सबसे बड़ी 34.27 किलोमीटर की लाइन है। 10.46 किलोमीटर एलिवेटेड और 23.80 भूमिगत लाइन है जिस पर 23 स्टेशन हैं। इस लाइन पर कालिंदी कुंज पर 3441 वर्गमीटर जमीन को लेकर विवाद था जो कि खत्म हो गया है।
अब इस लाइन के दो बड़े सेक्शन जनकपुरी से टी-वन आईजीआई एयरपोर्ट के बीच 10 किलोमीटर और इससे पहले कालकाजी मंदिर से बॉटेनिकल गार्डन के बीच 13 किलोमीटर पर अक्तूबर से ट्रायल चल रहा है। मार्च 2017 तक इस लाइन पर 97.04 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मेट्रो का कहना है कि मई से सितंबर 2017 के बीच इस लाइन का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
मुंडका से बहादुरगढ़ लाइन
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मुंडका से बहादुरगढ़ लाइन दिल्ली से बाहर बहादुरगढ़ तक जा रही है। कुल 11.18 किलोमीटर लंबी यह लाइन पूरी तरह एलिवेटेड है। कुल 7 स्टेशन हैं। अक्तूबर 2016 तक 83.90 और मार्च 2017 तक महज 5 फीसदी ज्यादा यानी 87.18 फीसदी काम पूरा हुआ है। इसे भी दिसबर 2016 में पूरा होना था लेकिन मार्च 2017 तक डेडलाइन पता नहीं था। अब अप्रैल में मेट्रो ने बताया कि 5000 वर्गमीटर जमीन की जरूरत थी वह मिली चुकी है। अब इस लाइन को भी एक साल देरी से यानी दिसंबर 2017 तक पूरा कर लिया जाएगा।
द्वारका-नजफगढ़ लाइन
द्वारका से आगे नजफगढ़ तक इस लाइन का काम भी देरी से चल रहा है। 4.29 किलोमीटर लंबी इस लाइन पर कुल तीन स्टेशन हैं। अक्तूबर 2016 तक कुल 65.30 फीसदी काम हुआ था। इस लाइन को 2012 से मंजूरी मिली है मगर 292 वर्ग मीटर की जमीन विवाद के चलते काम रुका पड़ा है। इसके चलते मार्च 2017 तक मेट्रो इसकी डेडलाइन भी तय नहीं कर पाया था। अब मेट्रो ने अप्रैल में इसकी भी डेडलाइन दिसंबर 2017 रखी है। मार्च 2017 तक इस लाइन पर 72.18 फीसदी काम पूरा हो चुका है।